ऋषिकेश में शिव भक्ति की लहर
पवित्र सावन का महीना आरंभ होते ही उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित शिव मंदिर हर हर महादेव के उद्घोष से गुंजायमान हो गए हैं। योग और आध्यात्म का केंद्र माना जाने वाला ऋषिकेश शहर न केवल गंगा नदी की निर्मल धारा के लिए जाना जाता है, बल्कि यह अपने प्राचीन और चमत्कारी शिव मंदिरों के लिए भी दुनिया भर के श्रद्धालुओं में लोकप्रिय है।
सावन में शिव दर्शन का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के दौरान इन मंदिरों में जलाभिषेक करने से भक्तों के सभी दुखों का नाश होता है। ऋषिकेश की आध्यात्मिक ऊर्जा और शिव की आराधना के संगम में डूबने के लिए भक्त दूर दूर से यहां आते हैं। यदि आप भी इस सावन में बाबा भोलेनाथ के दर्शन करना चाहते हैं, तो इन 8 पावन मंदिरों की यात्रा आपके लिए विशेष हो सकती है:
- नीलकंठ महादेव मंदिर: यह ऋषिकेश का सबसे प्रसिद्ध शिव धाम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था, जिस स्थान पर उन्होंने विश्राम किया, वह आज नीलकंठ महादेव के रूप में विख्यात है।
- भूतनाथ मंदिर: यह मंदिर अपनी शांत और दिव्य ऊर्जा के लिए जाना जाता है, जो नीलकंठ मंदिर के समीप ही स्थित है।
- पशुपतिनाथ मंदिर: भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित यह मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है।
- चंद्रेश्वर महादेव मंदिर: चंद्र देव द्वारा स्थापित यह मंदिर शिव भक्ति की अटूट निशानी माना जाता है।
- शत्रुघ्न मंदिर: भगवान राम के भाई शत्रुघ्न द्वारा स्थापित इस स्थान पर भी महादेव के विशेष दर्शन होते हैं।
- भरत मंदिर: हालांकि यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन यहां के परिसर में भगवान शिव की प्राचीन प्रतिमाएं और पूजा अर्चना की समृद्ध परंपरा देखने को मिलती है।
- विरभद्र महादेव मंदिर: यह स्थान राजा दक्ष के यज्ञ विध्वंस की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जहां भगवान शिव ने वीरभद्र का अवतार लिया था।
- तत्केश्वर महादेव मंदिर: शांत वातावरण में स्थित यह मंदिर शिव साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
सावन के इस पावन काल में इन मंदिरों की यात्रा न केवल आपको मानसिक शांति प्रदान करेगी, बल्कि भगवान शिव की कृपा दृष्टि भी आप पर बनी रहेगी।
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