बुरहानपुर के सोहनलाल की प्रेरणादायक कहानी: 20 हजार के कर्ज से शुरू किया पराठे का ठेला, आज लाखों में है कमाई

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के रहने वाले सोहनलाल ने महज सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद पराठे का ठेला लगाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। आज वे न केवल खुद लाखों कमा रहे हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।

सफलता की एक अनूठी दास्तान

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला इन दिनों युवाओं के नए व्यापारिक विचारों के लिए चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहाँ के युवा न केवल पारंपरिक नौकरियों की तलाश कर रहे हैं, बल्कि अपने दम पर स्टार्टअप और स्वरोजगार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी रास्तीपुरा इलाके के रहने वाले सोहनलाल महाजन की है। सोहनलाल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि व्यक्ति में मेहनत करने का जज्बा हो, तो कम पढ़ाई-लिखाई और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

होटल के काम से ठेले की शुरुआत तक का सफर

सोहनलाल ने बताया कि उन्होंने केवल सातवीं कक्षा तक ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्होंने बहुत कम उम्र में ही काम की तलाश शुरू कर दी थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थानीय होटल, पंचवटी, में कर्मचारी के रूप में की थी। वहां काम करते हुए उन्होंने खाना पकाने की बारीकियां सीखीं। वर्ष 2015 में उनके मन में अपना खुद का काम करने का विचार आया। उस समय उनके पास पूंजी की कमी थी, जिसके लिए उन्होंने बैंक से ₹20,000 का ऋण लिया और अपने छोटे से व्यवसाय का सपना साकार किया।

नेहरू स्टेडियम के पास से मिली पहचान

सोहनलाल ने अपने पराठे के ठेले को नेहरू स्टेडियम के पास लगाना शुरू किया। शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि वह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था। मेहनत अधिक थी और मुनाफा शुरुआती दौर में काफी कम था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी। जैसे-जैसे उनके हाथ के बने पराठों का स्वाद लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगा, ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और उनका काम चल पड़ा। आज वे पिछले 11 सालों से लगातार उसी स्थान पर अपना ठेला संचालित कर रहे हैं।

मेनू और कमाई का गणित

सोहनलाल के ठेले की सबसे बड़ी खासियत उनके द्वारा बनाए जाने वाले चार अलग-अलग तरह के पराठे हैं। लोग विशेष रूप से उनके आलू के पराठे और मेथी के पराठों के दीवाने हैं। इसके अलावा वे पनीर और सेव के पराठे भी ग्राहकों को परोसते हैं। उनकी दुकान पर पराठों की कीमत ₹20 से लेकर ₹70 तक रखी गई है। अपने मेहनत और हुनर के दम पर सोहनलाल आज हर दिन लगभग ₹1,000 की कमाई कर लेते हैं। इस प्रकार उनकी सालाना आय तीन से चार लाख रुपये के बीच हो जाती है, जो उनके निरंतर कठिन परिश्रम का परिणाम है।

रोजगार के अवसर भी किए पैदा

अपनी आजीविका चलाने के साथ ही सोहनलाल ने सामाजिक उत्तरदायित्व का भी परिचय दिया है। आज वे अपने साथ क्षेत्र के दो अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं। सोहनलाल का मानना है कि होटल में जो अनुभव उन्होंने प्राप्त किया था, वही आज उनके काम आ रहा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि किसी भी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए। यदि ईमानदारी और स्वाद की गुणवत्ता के साथ काम किया जाए, तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। आज सोहनलाल का ठेला बुरहानपुर के उन लोगों के लिए एक मिसाल बन गया है जो कम संसाधनों में अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं।

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