मशहूर अभिनेता राजेश कुमार का फिल्मी सफर: कर्ज में डूबकर छोड़ दी थी एक्टिंग, अब गांव में बहनों के साथ करेंगे खेती

लोकप्रिय अभिनेता राजेश कुमार मुंबई की चकाचौंध से दूर अपने पैतृक गांव गया लौट आए हैं, जहां वे अब खेती के एक बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहे हैं। इस नेक काम में विदेशों से वापस आ रही उनकी बहनें भी उनका साथ देंगी।

गया के लाल का अनोखा सफर

बिहार के गया जिले के गुरुआ प्रखंड स्थित बरमा गांव के रहने वाले मशहूर फिल्म अभिनेता राजेश कुमार इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपनी छुट्टियों के दौरान वे अपने पैतृक गांव पहुंचे हैं और यहां के शांत माहौल में सुकून के पल बिता रहे हैं। राजेश कुमार केवल एक मंझे हुए कलाकार ही नहीं हैं, बल्कि वे अपनी जड़ों से बेहद गहराई से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि वे साल में दो से तीन बार अपने गांव जरूर आते हैं। राजेश कुमार ने खुलासा किया है कि वे गांव में अब खेती और किसानी के क्षेत्र में कुछ नया करने की योजना बना रहे हैं।

खेती में बहनों का साथ

राजेश कुमार के इस कृषि प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें वे अकेले नहीं हैं। उन्होंने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है जिसके तहत आने वाले दिनों में अपने गांव के अलावा आसपास के चार से पांच गांवों के किसानों को जोड़कर आधुनिक और लाभकारी खेती की जाएगी। इस मुहिम को मजबूती देने के लिए उनकी दोनों बहनें भी विदेश से गांव लौट रही हैं। उनकी बहनें जो अब तक फिनलैंड और अमेरिका जैसे देशों में बेहतरीन और ऊंचे पदों पर नौकरी कर रही थीं, वे भी अब इस सामाजिक और कृषि आधारित कार्य में राजेश का पूरा साथ देंगी।

शुरुआती संघर्ष और एक्टिंग का जुनून

बरमा गांव से निकलकर मुंबई की माया नगरी तक का राजेश का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्हें बचपन से ही अभिनय का बेहद शौक था। इस शौक की शुरुआत गया में पढ़ाई के दौरान ही हो गई थी, जहां उन्होंने नर्सरी क्लास में ही अपनी पहली एक्टिंग की थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने सपनों को पंख देने के लिए मुंबई का रुख किया। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। कई दिनों तक उन्हें काम की तलाश में अलग-अलग निर्देशकों और निर्माताओं के घरों के चक्कर काटने पड़े।

करियर की बुलंदियां और सुपरहिट धारावाहिक

संघर्ष के लंबे दौर के बाद आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें 'एक महल हो सपनों का' धारावाहिक में काम करने का पहला बड़ा अवसर मिला। इसके बाद तो राजेश कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'कुसुम', 'साराभाई बनाम साराभाई', 'घर एक मंदिर', 'कोटा फैक्ट्री' और 'खिचड़ी' जैसे चर्चित धारावाहिकों में अपनी दमदार अदायगी से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। छोटे पर्दे के साथ-साथ उन्होंने एक दर्जन से अधिक फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। उनकी हालिया फिल्मों में 'जवानी तो इश्क होना है', 'सैयारा', 'हड्डी', 'सुपर नानी' और 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2' शामिल हैं। राजेश का कहना है कि इसी वर्ष उनकी कई और फिल्में रिलीज होने वाली हैं, जिनसे उन्हें काफी उम्मीदें हैं। इसके अलावा, जल्द ही अभिनेता पंकज त्रिपाठी के साथ भी उनकी एक फिल्म रिलीज होने जा रही है।

कर्ज से एक्टिंग तक की वापसी

राजेश कुमार के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब वे गहरे वित्तीय संकट में घिर गए थे। उन पर भारी मात्रा में कर्ज हो गया था, जिसकी वजह से वे पूरी तरह से टूट चुके थे। उस दौर में उन्होंने एक्टिंग छोड़ने तक का मन बना लिया था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और डटकर परिस्थितियों का सामना किया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपना पूरा कर्ज चुकाया और दोबारा अभिनय की दुनिया में धमाकेदार वापसी की।

नाम का रोचक किस्सा

स्थानीय पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजेश कुमार ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस समय बिहार में जातिवाद का बोलबाला चरम पर था, उस वक्त उनके पिता ने उनका नाम राजेश सिंह न रखकर राजेश खन्ना रखा था ताकि उनकी एक अलग पहचान बन सके। हालांकि, बाद में उनका नाम राजेश कुमार रखा गया। राजेश कुमार अब अपने गांव के किसानों को साथ लेकर कृषि के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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