अधरशिला का पौराणिक और धार्मिक महत्व
राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत में सिरोही की अधरशिला का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह न केवल अपनी प्राकृतिक बनावट के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका गहरा संबंध पौराणिक कथाओं से भी है। किंवदंतियों के अनुसार, प्राचीन काल में तपस्वी राजा अम्बरीष ने इसी पवित्र स्थान का चयन अपनी कठोर तपस्या के लिए किया था। उनकी तपस्या की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने संपूर्ण देवलोक को प्रभावित कर दिया था।
हवा में तैरती चट्टान का रहस्य
स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के बीच यह स्थान एक बड़े रहस्य के रूप में प्रसिद्ध है। इस विशालकाय शिला की स्थिति इतनी विचित्र है कि जब इसे थोड़ी दूरी से देखा जाता है, तो यह जमीन से ऊपर हवा में तैरती हुई प्रतीत होती है। इसी अद्भुत और चमत्कारी दृश्य के कारण इसे अधरशिला के नाम से जाना जाता है। भौतिक विज्ञान और प्राकृतिक आश्चर्य के इस अनोखे संगम को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ पहुंचते हैं।
इंद्र का वज्र भी रहा असफल
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं की मानें तो राजा अम्बरीष की तपस्या को खंडित करने के उद्देश्य से देवराज इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया था। कहा जाता है कि इस प्रहार का उद्देश्य शिला को हिलाना या विचलित करना था, लेकिन राजा की तपस्या के प्रभाव के आगे इंद्र का वह शक्तिशाली वार भी निष्फल साबित हुआ। आज भी यह शिला अपने स्थान पर पूरी तरह अडिग और स्थिर है, जो इसे आस्था और चमत्कार का एक बेजोड़ केंद्र बनाती है। पर्यटक और श्रद्धालु आज भी इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचकर इसकी दिव्यता का अनुभव करते हैं।
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