महुआ मोइत्रा के राजमा और इस्कॉन वाले बयान पर मचा घमासान, बंगाल की राजनीति में उबाल

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने राजमा को लेकर अपनी अनभिज्ञता जाहिर की और विधानसभा कैंटीन को लेकर इस्कॉन पर टिप्पणी की है।

विवादों में महुआ मोइत्रा का ताजा बयान

अपनी बेबाक और तीखी बयानबाजी के लिए पहचानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनका विवाद किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे या संसद की कार्यवाही को लेकर नहीं, बल्कि खान-पान की आदतों और अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कॉन से जुड़ी उनकी टिप्पणियों के कारण हुआ है। महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए हालिया बयानों ने न केवल सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी गरमा दिया है।

क्या है पूरा मामला

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक इंटरव्यू के दौरान भोजन, पोषण और मिड-डे मील जैसी सरकारी योजनाओं पर बात करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने तुरंत ही सोशल मीडिया पर एक नई जंग शुरू कर दी है। उन्होंने बच्चों के पोषण और सरकारी कैंटीन को लेकर अपनी बात रखते हुए जो दावे किए, उन्हें लेकर अब चारों तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। महुआ मोइत्रा ने शाकाहार और मांसाहार के बीच तुलना करते हुए भी अपनी राय रखी, जो कि काफी विवादित मानी जा रही है।

राजमा को लेकर महुआ का चौंकाने वाला बयान

इंटरव्यू के दौरान जब महुआ मोइत्रा से पूछा गया कि क्या सरकारी मिड-डे मील योजनाओं में राजमा-चावल को शामिल किया जाना चाहिए, तो उन्होंने बड़ी हैरानी जाहिर की। महुआ ने कहा कि उन्हें राजमा के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बंगाल के लोगों को राजमा के बारे में पता भी है। महुआ मोइत्रा ने कहा, मुझे खुद नहीं पता था कि राजमा क्या होता है, जब तक कि मैं दिल्ली नहीं गई थी। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर बंगाल में राजमा-चावल के बारे में इतनी चर्चा क्यों हो रही है। इस बयान के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने महुआ को ट्रोल करना शुरू कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि आज के वैश्वीकरण के युग में यह कहना कि बंगाली लोग राजमा से अनजान हैं, पूरी तरह से गलत और हास्यास्पद है।

प्रोटीन और अंडे की वकालत

पोषण के वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए महुआ मोइत्रा ने मिड-डे मील में अंडों को शामिल करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए पशु आधारित प्रोटीन बहुत जरूरी है और उन्होंने शाकाहारी विकल्पों पर तंज कसा। महुआ मोइत्रा ने कहा, केवल सोया ही एक ऐसा नॉन-एनिमल प्रोटीन है जिसे प्रथम श्रेणी में रखा जा सकता है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि हमारे बच्चे सोयाबीन खाना बिल्कुल पसंद नहीं करते। महुआ मोइत्रा ने अंडे को क्लास-ए प्रोटीन करार देते हुए कहा कि शरीर के विकास के लिए जरूरी सभी एमीनो एसिड इसमें मौजूद होते हैं।

इस्कॉन को लेकर विवादास्पद टिप्पणी

महुआ मोइत्रा ने केवल भोजन पर ही नहीं, बल्कि संस्थाओं पर भी हमला बोला। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा की कैंटीन को लेकर तंज कसा। महुआ ने पूछा कि आखिर विधानसभा की कैंटीन का प्रबंधन इस्कॉन को क्यों नहीं सौंपा जा सकता? दरअसल, इस्कॉन अपनी पूरी तरह से सात्विक और शाकाहारी भोजन व्यवस्था के लिए जानी जाती है। महुआ मोइत्रा का यह कटाक्ष उन नीतियों के प्रति था जो शाकाहारी भोजन को बढ़ावा दे रही हैं। महुआ का यह बयान धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी नागवार गुजरा है।

सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया

महुआ मोइत्रा के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की विपक्षी पार्टियों को एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी ने महुआ के बयानों को बंगाली संस्कृति का अपमान बताया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि महुआ मोइत्रा जानबूझकर बंगाली समाज को देश की मुख्यधारा से अलग और पिछड़ा दिखाने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि राजमा और शाकाहारी प्रोटीन आज बंगाल के हर घर का हिस्सा हैं और महुआ मोइत्रा का बयान जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

सांस्कृतिक और वैचारिक बहस

महुआ मोइत्रा के इन बयानों ने एक बार फिर शाकाहार बनाम मांसाहार और बंगाली खान-पान बनाम उत्तर भारतीय खान-पान की बहस को जीवित कर दिया है। जहां एक पक्ष महुआ मोइत्रा के बेबाक अंदाज का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष उनके बयानों को अपरिपक्व और विभाजनकारी बता रहा है। इस्कॉन पर की गई टिप्पणी ने धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के बीच एक गहरी नाराजगी को जन्म दिया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकती है। अब देखना यह है कि टीएमसी आलाकमान इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या महुआ मोइत्रा अपने बयानों पर सफाई देंगी या विवाद और बढ़ेगा।

https://hindi.news18.com/news/west-bengal/kolkata-mahua-moitra-statement-on-rajma-chawal-egg-soy-protein-iskcon-west-bengal-canteen-controversy-tmc-vs-bjp-10608205.html