बारिश में मच्छरों से हैं परेशान, तो अपनाएं ये आजमाए हुए घरेलू नुस्खे, फौरन मिलेगा छुटकारा

मानसून के दौरान मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है। इन देसी और पुराने तरीकों को अपनाकर आप अपने घर को सुरक्षित रख सकते हैं और मच्छरों से राहत पा सकते हैं।

मानसून और मच्छरों का प्रकोप

गर्मियों का मौसम खत्म होते ही बारिश ने दस्तक दे दी है। हालांकि बारिश का मौसम सुहावना होता है, लेकिन यह अपने साथ कई तरह की समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी घर में घुसने वाले कीटों से होती है, जिनमें मच्छर सबसे ऊपर हैं। जैसे ही रात का अंधेरा छाता है, मच्छरों की मौजूदगी का एहसास होने लगता है। यदि बीच में बिजली कट जाए, तो मच्छरों की भिनभिनाहट से मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक है। आजकल बाजार में मच्छरों को भगाने के लिए कई आधुनिक यंत्र मौजूद हैं, लेकिन उनका असर अक्सर बहुत कम समय के लिए ही होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि क्या कोई ऐसा तरीका है जो लंबे समय तक कारगर रहे? पुराने जमाने में हमारे पूर्वज मच्छरों से बचने के लिए कुछ प्रभावी उपाय किया करते थे जो आज भी बेहद असरदार साबित होते हैं।

मच्छरों के पनपने के कारण

गर्मियों में स्थितियां अलग होती हैं, लेकिन बारिश के दिनों में चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई देता है। तालाब, नालियां, घरों की छतें और सड़कों के किनारे जमा हुआ पानी मच्छरों के लिए स्वर्ग जैसा माहौल बनाता है। इस नमी और जमा पानी में मच्छरों के लार्वा के लिए पनपने का सबसे अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में मच्छर बहुत तेजी से प्रजनन करते हैं और उनकी आबादी में बेतहाशा वृद्धि होती है। आंकड़ों की मानें तो एक मच्छर अपने पूरे जीवनकाल में 500 से 3 हजार तक अंडे देने की क्षमता रखता है। चाहे पानी साफ हो या गंदा, बारिश के मौसम में हर जगह लार्वा पनप रहे हैं। इसलिए, समय रहते घर के आसपास जलभराव को रोकना बहुत जरूरी है।

स्वास्थ्य पर पड़ने वाला बुरा असर

मच्छरों का काटना सिर्फ एक शारीरिक परेशानी नहीं है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों का कारण भी बनता है। इनसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां फैलती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां चिकित्सा सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं, वहां मच्छरों से होने वाली बीमारियों के कारण कई बार जान तक चली जाती है। बीमारी न केवल शरीर को कमजोर बनाती है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक रूप से भी पूरी तरह थका देती है। इसके अलावा, इलाज में होने वाला आर्थिक खर्च भी एक अलग बोझ है।

मच्छरों को रोकने के प्रभावी उपाय

यदि आप चाहते हैं कि मच्छर घर में पनपें ही नहीं, तो सबसे पहले उस स्थान की सफाई करें जहां पानी ठहरा हुआ है। कूलर के पानी को हफ्ते में कम से कम दो बार साफ करें। ठहरे हुए पानी की निकासी करें क्योंकि मच्छर हमेशा इसी तरह के पानी में अंडे देते हैं। इसके अतिरिक्त, घर की नियमित सफाई बनाए रखें और पानी के बर्तनों या टैंकों में लिक्विड का उपयोग करें जो मच्छरों को रोकने में मदद करे।

नीम का धुआं और अन्य देसी तरीके

मच्छरों को भगाने का एक बेहद पुराना और आजमाया हुआ तरीका है सूखी नीम की पत्तियों का धुआं। यदि आप अपने घर के आंगन में एक छोटा सा कुंड बनाकर सूखी नीम की पत्तियों को कंडे के साथ जलाकर धुआं करते हैं, तो मच्छर घर से फौरन भाग खड़े होंगे। ग्रामीण अंचलों में आज भी यह पैंतरा बहुत कारगर साबित होता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आग सुरक्षित तरीके से फैले, ताकि कोई बड़ा नुकसान न हो। इसके अलावा, नीम को पानी में उबालकर उस पानी का स्प्रे पर्दों पर किया जा सकता है। अक्सर मच्छर पर्दों के पीछे छिपे रहते हैं, जहां यह स्प्रे उन्हें बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही, शाम के समय घर की खिड़की और दरवाजे बंद रखने चाहिए ताकि मच्छर अंदर प्रवेश न कर सकें।

इन पौधों की मदद से पाएं राहत

यदि आपको बागवानी का शौक है, तो आप अपने घर के भीतर या आसपास कुछ विशेष पौधे लगा सकते हैं। तुलसी, लेमनग्रास, गेंदा, पुदीना और रोजमेरी जैसे पौधे मच्छरों के प्राकृतिक दुश्मन माने जाते हैं। इन पौधों की पत्तियों से निकलने वाली तीखी गंध मच्छरों को दूर रखती है। इन पौधों के गमलों को घर के मुख्य दरवाजे, खिड़कियों या बालकनी के पास रखना चाहिए, ताकि ये एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करें और मच्छर घर के अंदर प्रवेश न कर सकें।

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