मखाना किसानों के लिए खास सलाह: फूल आने के समय अपनाएं ये तीन तरीके, पैदावार में होगी 30 प्रतिशत तक वृद्धि

मखाना की खेती करने वाले किसानों के लिए फूल आने का चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सही पोषक तत्वों का छिड़काव करके बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

मखाना खेती की बढ़ती लोकप्रियता

बिहार के मिथिलांचल और सीमांचल जैसे क्षेत्रों में मखाना की खेती अब किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले मखाना में बेहतर कमाई होने के कारण बड़ी संख्या में किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में मखाना के बाजार भाव और मांग में आई तेजी के कारण किसानों का मुनाफा बढ़ा है, जिससे वे अन्य फसलों को छोड़कर मखाना उत्पादन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

फूल आने का समय क्यों है महत्वपूर्ण

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मखाना की फसल में फूल आने का समय बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण होता है। यही वह चरण है जो तय करता है कि भविष्य में पैदावार कितनी होगी। इस दौरान पौधों को न केवल सही मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, बल्कि जलस्तर को संतुलित रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि इस दौरान फसल की ठीक से देखरेख की जाए, तो उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकती है।

खेत का प्रबंधन और सावधानी

पूर्णिया के कृषि महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. डी.के. महतो ने बताया कि इस समय मखाना के पौधों में फूल आने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह किसानों के लिए सतर्क रहने का समय है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखकर काम करें, तो वे अपनी फसल से कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इसके लिए पानी के स्तर को स्थिर बनाए रखना और कीटों या बीमारियों से फसल को बचाना अनिवार्य है। स्वस्थ फूल ही बेहतर फल में बदलते हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में इजाफा होता है।

बेहतर उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण छिड़काव

डॉ. महतो ने मखाना की उत्पादकता बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनका पालन करने से दानों की गुणवत्ता सुधरेगी और वे अधिक पुष्ट होंगे:

  • बोरोन का उपयोग: पौधों के पत्तों पर 1 से 5 ग्राम बोरोन को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इसे हर 15 दिनों के अंतराल पर दोहराना चाहिए। इससे फलन की प्रक्रिया बेहतर होती है और दाने मजबूत बनते हैं।
  • NPK का प्रयोग: 19:19:19 NPK (जलीय घुलनशील उर्वरक) की 5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में मिलाएं। इसे 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन बार छिड़कें। यह पौधों में फूल और फल की संख्या को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है।
  • सी वीड (Sea Weed) का छिड़काव: पौधों की संपूर्ण वृद्धि और मजबूती के लिए सी वीड आधारित जैव उत्पाद का उपयोग करें। इसकी 2 से 3 मिलीलीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिनों के अंतर पर छिड़काव करें। इससे फूल और फल को मजबूती मिलती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

मुनाफे का गणित

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सही समय पर इन पोषक तत्वों का सही अनुपात में उपयोग करते हैं और फसल की लगातार निगरानी करते हैं, तो आने वाले समय में उन्हें मखाना की पैदावार में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करने पर किसानों को न केवल बेहतर पैदावार प्राप्त होगी, बल्कि बाजार में उनकी फसल की गुणवत्ता के चलते उन्हें काफी आर्थिक लाभ भी होगा। मखाना किसान यदि इन सुझावों को अपनाते हैं, तो निश्चित रूप से उनके उत्पादन के साथ-साथ लाभ में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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