सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में जुटी उज्जैन पुलिस
धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इस महापर्व के दौरान करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। ऐसे में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे विकास और सड़क निर्माण कार्यों के कारण यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है। इसे देखते हुए पुलिस ने आम जनता और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है।
प्रतिबंधित मार्गों की जानकारी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि ट्रैफिक के दबाव को नियंत्रित करने के लिए हरिफाटक टी पॉइंट से नीलकंठ द्वार और यादव धर्मशाला तक के मार्ग पर ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा के संचालन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। एएसपी ने खुद घटनास्थल पर पहुंचकर वहां की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके।
प्रशासन और वाहन चालकों के बीच बनी सहमति
इस बड़े फैसले को लागू करने से पहले प्रशासन ने पूरी सावधानी बरती है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यातायात प्रतिबंध का निर्णय लेने से पहले ऑटो और ई-रिक्शा संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई थी। इस चर्चा में सभी पक्षों ने शहर की मौजूदा यातायात स्थिति और जाम की समस्या पर विचार किया। बैठक में मौजूद सभी प्रतिनिधियों ने इस फैसले का समर्थन किया है और माना है कि शहरवासियों को जाम से मुक्त रखने के लिए यह कदम अनिवार्य था।
श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए नई वैकल्पिक व्यवस्था
महाकाल मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक रास्तों की रूपरेखा भी तैयार की है। नीलकंठ द्वार का उपयोग अब विशेष रूप से प्रोटोकॉल और अति विशिष्ट अतिथियों के प्रवेश के लिए ही किया जाएगा। आम श्रद्धालु अब त्रिवेणी और इंटरप्रिटेशन सेंटर मार्ग का उपयोग कर दर्शन के लिए जा सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन बदलावों से श्रद्धालुओं की दर्शन की प्रक्रिया पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और दर्शनार्थियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, नीलकंठ द्वार से जुड़ी गलियों में भी यह प्रतिबंध सख्ती से लागू रहेगा। आम जनता को इस नई ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में जानकारी देने के लिए पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है और प्रमुख स्थानों पर साइनेज बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने सराहा प्रशासन का कदम
इस फैसले का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है। उज्जैन के 65 वर्षीय निवासी हरिराम ने बताया कि वे प्रतिदिन इन मार्गों से गुजरते हैं और अक्सर भारी जाम के कारण काफी परेशान होते थे। उन्होंने कहा कि जाम का मुख्य कारण बड़ी संख्या में दौड़ रहे ऑटो और ई-रिक्शा थे, जो अब सड़कों से हटा दिए गए हैं। यह पहल सराहनीय है क्योंकि लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु अब इस मार्ग से बिना किसी परेशानी के महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से उज्जैन आने वाले लोग शहर के बारे में एक बेहतर संदेश लेकर जाएंगे और स्थानीय लोग भी राहत महसूस करेंगे।
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