पलामू की प्रिंसी शाह की प्रेरणादायक कहानी: PMFME योजना ने कैसे एक महिला को बनाया सफल उद्यमी

झारखंड के पलामू जिले की प्रिंसी शाह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की मदद से सरसों तेल का अपना सफल कारोबार खड़ा किया है। आज वे 'श्री अर्पण' ब्रांड के जरिए न केवल शुद्ध तेल बेच रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर किसानों और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही हैं।

PMFME योजना से पलामू में नई क्रांति

केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण भारत में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) आज कई परिवारों के लिए जीवन बदलने वाली साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करना है। इसी कड़ी में झारखंड के पलामू जिले की सदर प्रखंड निवासी प्रिंसी शाह ने एक मिसाल कायम की है। उन्होंने सरकारी मदद और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर सरसों तेल मिल की स्थापना की है, जो आज उनके साथ-साथ गांव के कई अन्य लोगों की आजीविका का बड़ा आधार बन गई है।

डेयरी व्यवसाय से मिला प्रेरणा का स्रोत

प्रिंसी शाह के उद्यमी बनने का सफर काफी दिलचस्प है। उनके पति पहले से ही डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय में सक्रिय थे। डेयरी के काम के दौरान प्रिंसी का लगातार स्थानीय किसानों और ग्राहकों से आना-जाना और बातचीत होती रहती थी। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए कृषि आधारित अन्य व्यवसायों की काफी संभावनाएं हैं। उनके मन में विचार आया कि यदि डेयरी व्यवसाय में किसी समय मुनाफा कम होता है, तो सरसों तेल का उत्पादन आय का एक स्थिर और मजबूत विकल्प बन सकता है। इसके अलावा, जिन किसानों से वे दूध खरीदती थीं, उन्हीं से सरसों खरीदकर उन्हें बाजार उपलब्ध कराने का विचार भी उनके मन में आया। इस प्रकार, उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार किया जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और ग्रामीण युवाओं को रोजगार प्राप्त हो सके।

21 लाख रुपये के ऋण से साकार हुआ सपना

कोई भी बड़ा सपना बिना उचित आर्थिक सहयोग के अधूरा रह जाता है। प्रिंसी शाह ने अपने इस व्यापारिक विचार को हकीकत में बदलने के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से PMFME योजना के लिए आवेदन किया। सरकारी मानदंडों को पूरा करने के बाद, झारखंड ग्रामीण बैंक ने उन्हें 21 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया। प्रिंसी का स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि उन्हें सरकार की ओर से यह वित्तीय सहायता नहीं मिली होती, तो इतनी भारी-भरकम मशीनरी और प्लांट को स्थापित करना उनके बस में नहीं था। इस ऋण राशि ने उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाकर अपने उद्योग को ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान किया है।

आधुनिक तकनीक और शुद्धता का संगम

प्रिंसी की तेल मिल में लगी मशीनें अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हैं। इन मशीनों की कार्यक्षमता इतनी अधिक है कि ये एक घंटे में लगभग 120 किलोग्राम सरसों की पेराई कर सकती हैं। वे प्रतिदिन इस यूनिट में लगभग 3 से 4 क्विंटल सरसों का उपयोग तेल निकालने के लिए करती हैं। गुणवत्ता के मानकों को लेकर प्रिंसी बेहद सख्त हैं। सरसों की पेराई से पहले उनकी पूरी तरह से सफाई की जाती है और फिर उन्हें धूप में सुखाया जाता है। वे नमी की मात्रा जांचने के लिए मॉइस्चर मीटर का उपयोग करती हैं। प्रिंसी के अनुसार, सरसों में 7 से 8 प्रतिशत नमी होने पर ही तेल की गुणवत्ता सर्वोत्तम रहती है। तेल निकालने के बाद उसे फिल्टर मशीन से साफ किया जाता है और फिर पैकेजिंग की जाती है, ताकि ग्राहकों तक पूरी तरह शुद्ध उत्पाद पहुंचे।

'श्री अर्पण' ब्रांड की बाजार में बढ़ती धाक

प्रिंसी शाह ने अपने उत्पादों को एक खास पहचान देने के लिए 'श्री अर्पण' ब्रांड नाम से बाजार में उतारा है। उनका दावा है कि इस तेल में किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती है। वर्तमान में वे अपने इस शुद्ध सरसों तेल को 200 से 220 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बेच रही हैं। व्यवसाय के बारे में उनका कहना है कि शुरुआती दिनों में मुनाफा प्रतिशत बहुत अधिक नहीं होता है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार में पहुंच बढ़ती है, बिक्री के साथ मुनाफा भी बढ़ने लगता है। प्रिंसी का लक्ष्य केवल पैसा कमाना नहीं है, बल्कि वे चाहती हैं कि स्थानीय किसानों का सरसों सीधा उनके प्लांट तक आए जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हो। इसके अलावा, उन्होंने अपनी यूनिट में महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है, जिससे पलामू के ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी अब प्रेरित होकर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

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