बिहार के जमुई में खजाना दबा, फिर भी खाली हाथ क्यों है प्रदेश? करमटिया के सोने का सच

आंध्र प्रदेश में निजी गोल्ड माइन शुरू होने के बाद जमुई के करमटिया इलाके में छिपे स्वर्ण भंडार पर चर्चा तेज हो गई है। चार दशकों से अधिक समय बीतने के बाद भी यहां खनन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ काम और जमुई में सन्नाटा

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले स्थित जोन्नागिरी गांव में देश की पहली बड़ी निजी स्वर्ण खदान के संचालन की शुरुआत के साथ ही बिहार के जमुई जिले का करमटिया गांव सुर्खियों में आ गया है। इस विकास ने एक बार फिर उस पुराने सवाल को हवा दे दी है कि आखिर बिहार के जमीन के नीचे दबे सोने के भंडार का दोहन कब शुरू होगा। स्थानीय लोग और विशेषज्ञ यह जानने को उत्सुक हैं कि जब तकनीकी प्रगति के जरिए आंध्र प्रदेश में सोना निकाला जा सकता है तो जमुई की धरती अब तक क्यों अछूती बनी हुई है।

संसद में भी हो चुकी है पुष्टि

बिहार के जमुई जिले के सोनो क्षेत्र को लेकर सरकारी स्तर पर बड़े दावे किए जा चुके हैं। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र को देश के प्राथमिक स्वर्ण भंडार का सबसे बड़ा केंद्र माना गया है। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो देश के कुल स्वर्ण भंडार का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में होने का अनुमान जताया गया था। इतने बड़े पैमाने पर भंडार की उपलब्धता के संकेत मिलने के बाद से ही यहां खनन की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं।

चार दशक का लंबा इंतजार

जमुई के करमटिया इलाके में सोने की मौजूदगी के संकेत बीते चार दशक से भी ज्यादा समय से मिल रहे हैं। लंबे समय तक इस विषय पर चर्चा तो होती रही, लेकिन ठोस खनन कार्य शुरू करने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा सका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि संसाधन होने के बावजूद खनन प्रक्रिया में देरी के पीछे की मुख्य वजह क्या है। क्या यह प्रशासनिक सुस्ती है, नीतिगत अड़चनें हैं, या फिर तकनीकी चुनौतियां, इन सवालों के जवाब आज भी आम जनता के लिए पहेली बने हुए हैं।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता

जोन्नागिरी मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से स्वर्ण उत्खनन को गति दी जा सकती है। अब जमुई के लोगों को उम्मीद है कि बिहार सरकार और केंद्र मिलकर इस दिशा में कोई कार्ययोजना तैयार करेंगे ताकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को नई ऊंचाई मिल सके। फिलहाल तो करमटिया की कहानी अधूरी है और यहां की जमीन के नीचे छिपे अरबों के खजाने के बाहर आने का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है।

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