खीरे की खेती पर 99 लाख की सब्सिडी विवाद: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने दी सफाई

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपने ही मंत्रालय से खीरे की खेती के लिए भारी-भरकम सब्सिडी लेने के आरोप लगे हैं। मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने एक किसान के तौर पर नियमों का पालन करते हुए आवेदन किया था।

विवाद के घेरे में कृषि राज्य मंत्री

केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में हैं। उन पर अपने पद का इस्तेमाल करते हुए खुद के ही मंत्रालय से खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी हासिल करने का आरोप लगा है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है क्योंकि यह सब्सिडी जिस गति से मिली, वह चर्चा का विषय बन गई है। भागीरथ चौधरी ने मंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही महीनों बाद, अप्रैल 2025 में इस सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। हैरानी की बात यह है कि उनके आवेदन को मात्र 14 दिनों के भीतर ही आधिकारिक मंजूरी दे दी गई।

मंत्री का जवाब: मैं किसान हूं, कुछ छिपाया नहीं

विवाद बढ़ने पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने खुद सामने आकर अपनी बात रखी। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए स्पष्ट किया कि वे एक किसान हैं और बचपन से ही कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, मैं एक किसान हूं और खेती-बाड़ी में मेरा पुराना नाता है। मैंने इस पूरे मामले में कुछ भी छिपाया नहीं है। चौधरी के अनुसार, देश के हजारों किसान पॉलीहाउस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं, इसलिए उन्होंने भी एक किसान के तौर पर प्रक्रिया का पालन किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने 2018 में ही आवेदन किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खेत पर एक बोर्ड लगा हुआ है जिस पर लिए गए लोन और सब्सिडी की पूरी जानकारी दर्ज है। उनका कहना है कि वे अपने खेत पर अन्य किसानों को नई तकनीक और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी देते हैं और स्थानीय अधिकारियों ने समय-समय पर उनके खेत का दौरा भी किया है।

मंत्रालय और बोर्ड की भूमिका

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस विभाग से सब्सिडी मिली, वह भागीरथ चौधरी के स्वयं के मंत्रालय के अधीन आता है। यह सब्सिडी 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। इस योजना का संचालन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) द्वारा किया जाता है, जो कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की वेबसाइट के मुताबिक, इसके कामकाज की देखरेख निदेशक मंडल द्वारा की जाती है, जिसके पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री और उपाध्यक्ष केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री होते हैं।

सब्सिडी के नियम और प्रोजेक्ट का विवरण

बागवानी के विकास के लिए चलाई जा रही इस योजना में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और विभिन्न प्रकार के फूलों जैसे गुलाब, एंथुरियम और ऑर्किड की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। इस योजना में प्रति परिवार अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। भागीरथ चौधरी का खीरे की खेती का प्रोजेक्ट उन 467 प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिन्हें नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड ने बागवानी फसलों के उत्पादन और प्रबंधन के तहत मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट 16,592 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। मंत्री का तर्क है कि सब्सिडी की स्वीकृति में उनका कोई व्यक्तिगत दखल नहीं होता, बल्कि यह विभागीय मानकों के आधार पर एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही संभव हुआ है।

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