पटना के कचरे का होगा वैज्ञानिक समाधान
बिहार की राजधानी पटना के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के रामाचक बैरिया इलाके में पिछले कई वर्षों से डंप किए जा रहे कचरे के विशाल पहाड़ से अब शहर को मुक्ति मिलने जा रही है। पटना नगर निगम और नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ लिया है। कचरे के इस ढेर को हटाने और उससे उपयोगी संसाधन बनाने के लिए हैदराबाद की एक निजी कंपनी का चयन कर लिया गया है। इस पूरी योजना के तहत कचरे से न केवल बिजली का उत्पादन होगा, बल्कि बायोगैस और जैविक खाद भी तैयार की जाएगी।
प्रोजेक्ट की कुल लागत और कार्य योजना
इस महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को स्थापित करने के लिए लगभग 514.49 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, चयनित कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड यानी एलओए सौंप दिया गया है, और जल्द ही दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस प्लांट की स्थापना के साथ ही मानसून के तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कंपनी को इस परियोजना को धरातल पर उतारने और पूरा करने के लिए दो साल छह महीने यानी कुल ढाई साल का समय निर्धारित किया गया है। इसके लिए बैरिया में 40 एकड़ भूमि पहले ही उपलब्ध करा दी गई है, ताकि आधुनिक मशीनों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को स्थापित किया जा सके।
कचरे से बिजली और बायोगैस बनाने की तकनीक
यह प्लांट पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होगा। इसमें सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग करके उनका प्रसंस्करण किया जाएगा। प्लांट की कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सूखे कचरे को उच्च तापमान पर जलाकर भाप तैयार की जाएगी, जिससे टरबाइन और जनरेटर चलाकर बिजली बनाई जाएगी।
- गीले कचरे को विशेष बायो-मीथेनेशन तकनीक का उपयोग करके सड़ाया जाएगा, जिससे बायोगैस यानी मिथेन गैस का उत्पादन होगा।
- इसके अतिरिक्त, कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद या कंपोस्ट भी तैयार की जाएगी।
प्लांट की क्षमता और दायरा
इस प्लांट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 15 मेगावाट तय की गई है। यह सुविधा न केवल पटना नगर निगम के क्षेत्र के लिए होगी, बल्कि आसपास के कई अन्य नगर निकायों का कचरा भी यहीं संसाधित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में फुलवारी शरीफ, खगौल, संपतचक, फतुहा, मनेर, दानापुर, बिहटा, बख्तियारपुर, मसौढ़ी, नौबतपुर और पुनपुन शामिल हैं। यहाँ प्रतिदिन 1600 टन से अधिक कचरा पहुंचना तय है, जिसका निपटारा पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से होगा।
प्लांट के मुख्य घटक और सुविधाएं
प्रस्तावित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में विभिन्न प्रकार की अत्याधुनिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:
- 100 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-मीथेनेशन प्लांट।
- 250 टन क्षमता का एमआरएफ और आरडीएफ प्लांट।
- 700 टन क्षमता का कंपोस्ट प्लांट।
- 325 टन क्षमता वाला वैज्ञानिक लैंडफिल।
- लिचेट ट्रीटमेंट प्लांट और प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट।
इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन से पटना में खुले में कचरा फेंकने की पुरानी समस्या का अंत होगा और शहर को एक आधुनिक कचरा प्रबंधन प्रणाली मिलेगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल होगा, बल्कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की दिशा में एक बड़ा कीर्तिमान भी साबित होगा।
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