छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खरीफ सीजन की शुरुआत हमेशा से एक नई उम्मीद लेकर आती है। इस वर्ष भी धान की बुआई को लेकर खेतों में हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसान अब उन आधुनिक और अधिक उपज देने वाली धान की उन्नत किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं जो कम समय में तैयार होकर उन्हें बेहतर मुनाफा दे सकें। इसी सिलसिले में कृषि विज्ञान केंद्र बालोद ने स्थानीय किसानों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की एक बेहद उन्नत किस्म सीजी तेजस्वी की खेती अपनाने का सुझाव दिया है। यह विशेष किस्म न केवल बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाती है, बल्कि किसानों को उम्मीद से कहीं अधिक पैदावार देने में भी पूरी तरह सक्षम है।
सीजी तेजस्वी धान की प्रमुख विशेषताएं और उत्पादन क्षमता
कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के जाने-माने विषय विशेषज्ञ ए.आर. गौर के अनुसार, छत्तीसगढ़ की बदलती जलवायु और मौसम के मिजाज को ध्यान में रखते हुए सीजी तेजस्वी धान की किस्म को एक बेहतरीन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इस धान की सबसे बड़ी खासियत इसकी सीमित समय अवधि है। यह फसल मात्र 130 से 135 दिन के भीतर पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। समय पर फसल की कटाई होने से किसानों को अगली फसल की तैयारी करने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है।
अगर बात उत्पादन की करें तो सामान्य परिस्थितियों में भी इस धान से प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक की बंपर उपज आसानी से हासिल की जा सकती है। यह पैदावार अन्य पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी अधिक है, जो सीधे तौर पर किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
किस तरह की मिट्टी के लिए उपयुक्त है यह किस्म?
आमतौर पर किसानों को हल्की या कम उपजाऊ भूमि में अच्छी फसल लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेकिन सीजी तेजस्वी धान इस समस्या का भी एक प्रभावी समाधान पेश करती है। विशेषज्ञ ए.आर. गौर ने स्पष्ट किया कि यह किस्म मध्यम और हल्की दोनों तरह की जमीनों के लिए अत्यधिक उपयुक्त और लाभकारी है। इसके बारीक और हल्के दाने बाजार में काफी पसंद किए जाते हैं।
इस धान की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- इसका दाना काफी हल्का और पतला होता है, जिसके कारण स्थानीय बाजारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और इसका अच्छा मूल्य मिलता है।
- दाना बारीक होने के बावजूद इसका वजन बहुत बेहतर आता है, जिससे किसानों को मंडी में तौल के समय सीधे तौर पर अधिक लाभ मिलता है।
- कमजोर या मध्यम उर्वरता वाली मिट्टी में भी इसके पौधे बहुत मजबूती से खड़े रहते हैं और उनमें शानदार बालियां आती हैं।
बुआई की विधियां और बीजोपचार का सटीक तरीका
सीजी तेजस्वी धान की खेती करने के लिए किसान अपनी सुविधा के अनुसार दो अलग-अलग विधियों का चयन कर सकते हैं। इसकी खेती रोपाई विधि द्वारा भी सफलतापूर्वक की जा सकती है और इसे सीधी बुआई के माध्यम से भी खेतों में सीधे लगाया जा सकता है। हालांकि, जो किसान सीधे खेतों में बीज छिड़कने यानी खुर्रा बुआई विधि का उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए वैज्ञानिक बीजोपचार को बेहद अनिवार्य बताते हैं।
बीजोपचार करने से पौधों में बीज जनित रोगों के फैलने की आशंका लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाती है और बीजों का अंकुरण भी काफी स्वस्थ होता है। बीजोपचार की सही प्रक्रिया निम्नलिखित है:
- सबसे पहले बीजों को किसी अच्छे फफूंदनाशक या राइजोबियम के साथ अच्छी तरह उपचारित किया जाना चाहिए।
- इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में 2 ग्राम फफूंदनाशक की मात्रा मिलाकर बीजों को तैयार किया जाता है।
- इसके अतिरिक्त, बुआई की प्रक्रिया शुरू करने से करीब आधा या एक घंटा पहले बायो फर्टिलाइजर का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए।
इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने से पौधों की शुरुआती वृद्धि बहुत तेजी से होती है और फसल को शुरुआती दौर में ही रोगों से लड़ने की अद्भुत ताकत मिलती है।
बेहतर प्रबंधन से मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा
कृषि विशेषज्ञ ए.आर. गौर ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि यदि किसान सही समय पर खेतों में बुआई करें, बीजों का सही तरीके से उपचार करें और समय-समय पर संतुलित खाद प्रबंधन का पालन करें, तो वे इस किस्म से अपना मनचाहा उत्पादन और मुनाफा हासिल कर सकते हैं। बालोद सहित पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में सीजी तेजस्वी धान की यह किस्म किसानों के बीच बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस खरीफ सीजन में इस धान की खेती अपनाकर किसान अपनी आय को एक नया आयाम दे सकते हैं।
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