बांग्लादेश की पैंतरेबाजी: भारत के हाथ से निकल गया मंगला पोर्ट, बांग्लादेश इसे चीन को सौंपेगा

यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को नया मोड़ दे रहा है। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

बांग्लादेश ने भारत को 2015 में आवंटित मंगला पोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट को चीन को सौंपने का फैसला कर लिया है। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के दौरान 25 जून को दोनों देशों के बीच एक बड़ा समझौता हुआ। बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन्स अथॉरिटी (BEZA) ने चीनी सरकारी कंपनी चाइना सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (CCECC) के साथ चीन-बांग्लादेश मंगला पोर्ट इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।

यह जोन बागेरहाट जिले में मंगला पोर्ट के पास 110 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। मंगला पोर्ट भारतीय सीमा से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे चीन को क्षेत्र में जासूसी और सर्विलांस का मौका मिल सकता है।

विस्तृत घटनाक्रम

  • 2015: भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय समझौते के तहत मंगला पोर्ट क्षेत्र में इकोनॉमिक जोन बनाने का फैसला। भारत ने लाइन ऑफ क्रेडिट से फंडिंग का प्रावधान किया।
  • 2018: हिरानंदानी ग्रुप को डेवलपर के रूप में चुना गया।
  • 2020: 110 एकड़ जमीन भारत को सौंपी गई, लेकिन कोविड महामारी के कारण प्रगति रुकी।
  • अक्टूबर 2025: मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया।
  • 25 जून 2026: तारिक रहमान की मौजूदगी में बीजिंग में MoU साइन।

चीनी निवेशक इस जोन में दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, भारी उद्योग, गोदाम और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।

 यहां सर्विलांस सिस्टम लगाने और जासूसी गतिविधियों का मंसूबा रखता है। मंगला पोर्ट बंगाल की खाड़ी में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। चीन की मौजूदगी भारत के ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के पास बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। साथ ही, बांग्लादेश में सरकारी स्कूलों में मंदारिन भाषा पढ़ाने की तैयारी चल रही है।

अन्य संबंधित समझौते

  • चट्टोग्राम के अनवारा में चीनी इकोनॉमिक जोन के लिए चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन के साथ डील।
  • तीस्ता नदी परियोजना पर चीन के साथ सहमति।
  • निवेश प्रोत्साहन और व्यापार संबंधी कई MoU।

ये डीलें बांग्लादेश की नई सरकार (बीएनपी के तहत तारिक रहमान) की चीन की ओर झुकाव वाली नीति को दिखाती हैं।

भारत पर प्रभाव

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बड़ा झटका है। भारत ने हाल के वर्षों में Chabahar और Sittwe जैसे बंदरगाहों पर सफलता हासिल की थी, लेकिन मंगला का यह सौदा पड़ोसी नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देता है। भारत अब कूटनीतिक स्तर पर प्रतिक्रिया देने की तैयारी में है।

यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को नया मोड़ दे रहा है। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।