अर्थव्यवस्था पर नई उम्मीद की किरण
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में कई वैश्विक संस्थानों ने चिंताएं जताई थीं, लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने उत्साहजनक संकेत दिए हैं। जहां आरबीआई, विश्व बैंक, फिच, जेपी मॉर्गन और आईएमएफ जैसी दिग्गज संस्थाओं ने चालू वित्तवर्ष में भारत की विकास दर के घटने का अनुमान व्यक्त किया था, वहीं ईवाई ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एक अलग तस्वीर पेश की है। ईवाई के अनुसार, तमाम विपरीत परिस्थितियों और वैश्विक झटकों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था साल के अंत तक गति पकड़ सकती है।
विकास दर का अनुमान और आधार
ईवाई ने अपनी रिपोर्ट जिसका शीर्षक ईवाई इकनॉमी वॉच है, उसमें बताया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्तवर्ष 2026-27 में 6.6 से 6.8 फीसदी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सकारात्मक रुख के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार में सामान्य स्थिति की बहाली और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव मुख्य कारक हैं। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आती है, तो भारत अपनी विकास यात्रा को और अधिक तेजी से आगे बढ़ा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि अन्य एजेंसियां पहले विकास दर को 6.6 फीसदी के आसपास मान रही थीं, लेकिन ईवाई का अनुमान इससे कहीं अधिक उत्साहित करने वाला है।
अर्थव्यवस्था के प्रमुख आंकड़े
ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का विस्तार से आकलन किया है। संस्था के अनुसार मुख्य अनुमान इस प्रकार हैं:
- वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी वृद्धि दर 6.6 से 6.8 फीसदी रहने की उम्मीद है।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित महंगाई दर 4.5 फीसदी के आसपास रहेगी।
- बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि 12.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
- केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
- चालू खाते का घाटा जीडीपी का 1.5 फीसदी तक सीमित रहने का अनुमान जताया गया है।
ईवाई का मानना है कि निजी क्षेत्र की निरंतर सक्रियता और देश की ठोस आर्थिक बुनियाद के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत मजबूती से खड़ा है।
महंगाई पर राहत के संकेत
महंगाई को लेकर आम आदमी के लिए भी राहत की खबर है। जहां आरबीआई की एमपीसी बैठक में खुदरा महंगाई के 6 फीसदी तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी, वहीं ईवाई का नजरिया कुछ अलग है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा बाजार में सुधार होने से आपूर्ति से जुड़ी बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जिंसों की कीमतों में नरमी और आपूर्ति श्रृंखला बेहतर होने से खुदरा महंगाई दर घटकर 4.5 फीसदी पर नियंत्रित रहने की प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा लागत में कमी होने से चालू खाते के घाटे को भी 1.5 फीसदी पर थामने में मदद मिलेगी।
मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के ठोस प्रमाण
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती केवल अनुमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जीएसटी संग्रह, बिजली की खपत और पीएमआई जैसे महत्वपूर्ण संकेतक विकास की गति को दर्शा रहे हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में गतिविधियां खासी तेज बनी हुई हैं। साथ ही, ऋण वृद्धि में स्थिरता और औद्योगिक उत्पादन में आ रहे सुधार स्पष्ट संकेत हैं कि भारतीय बाजार की मांग अभी भी काफी मजबूत है, विशेष रूप से वाहन क्षेत्र में।
ईवाई ने निष्कर्ष के तौर पर कहा है कि मध्यम अवधि में घरेलू खपत, निवेश और सेवा क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन भारत के लिए विकास के तीन मुख्य स्तंभ बने रहेंगे। इसके साथ ही, देश का पेट्रोलियम परिवेश ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे रहा है, जो भविष्य में किसी भी बाहरी जोखिम के असर को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
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