क्रेडिट स्कोर के बदले समीकरण
भारत में अब लोन लेने का तरीका धीरे धीरे बदल रहा है। अब तक लोन की मंजूरी पूरी तरह से आपके पुराने कर्ज, क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल और उनके भुगतान पर टिकी होती थी। हालांकि, एक बड़ी आबादी ऐसी है जो अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाती है और हर महीने समय पर किराया चुकाती है, लेकिन उनके पास कोई औपचारिक क्रेडिट स्कोर नहीं होता। अब फिनटेक कंपनियां इस स्थिति को बदलने की तैयारी कर रही हैं। वे रेंट पेमेंट को वित्तीय विश्वसनीयता का एक मजबूत प्रमाण मान रही हैं, जिससे उन लोगों के लिए लोन के रास्ते खुलेंगे जिनकी वित्तीय प्रोफाइल अभी तक खाली थी।
क्यों जरूरी है क्रेडिट हिस्ट्री में बदलाव
मौजूदा समय में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का क्रेडिट स्कोर सिस्टम मुख्य रूप से पुराने कर्ज के रिकॉर्ड पर आधारित होता है। समस्या उन लोगों के साथ आती है जो पहली बार लोन लेने जाते हैं या जिन्होंने कभी भी किसी बैंक से क्रेडिट कार्ड नहीं लिया। इन लोगों के पास आय का स्रोत तो होता है, लेकिन क्रेडिट स्कोर की कमी के कारण बैंक उन्हें रिस्क वाला ग्राहक मान लेते हैं। ऐसे में युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को लोन प्राप्त करने में काफी परेशानी होती है, भले ही वे अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर बहुत अनुशासित क्यों न हों।
रेंट पेमेंट कैसे बनेगा वित्तीय आधार
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी युवा प्रोफेशनल के मासिक बजट में किराया सबसे बड़ा खर्च होता है। यदि कोई व्यक्ति लगातार कई वर्षों तक बिना किसी चूक के समय पर किराया दे रहा है, तो यह उसके वित्तीय अनुशासन का सबसे बड़ा सबूत है। वित्तीय क्षेत्र में अब अल्टरनेटिव डेटा का महत्व बढ़ रहा है। बैंकिंग व्यवस्था में किराए के भुगतान को शामिल करने से उन लाखों लोगों को मुख्यधारा में शामिल होने का मौका मिलेगा, जिनके पास अब तक कोई मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल नहीं थी। यह प्रणाली यह दर्शाती है कि व्यक्ति अपनी देनदारियों को लेकर कितना गंभीर है।
एक्सपर्ट की राय और भविष्य की राह
इस विषय पर जानकारी देते हुए रेंटेनपे की को फाउंडर और सीईओ सरिका शेट्टी ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में युवा अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा किराए पर खर्च करते हैं और उनके पास कई वर्षों का भुगतान रिकॉर्ड होता है। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड व्यक्ति की वित्तीय जिम्मेदारी और समय पर भुगतान करने की क्षमता को समझने का एक बेहतरीन जरिया हो सकता है।
क्या है रेंट आइडेंटिटी लेयर
कंपनियां अब एक नई प्रणाली पर काम कर रही हैं जिसे रेंट आइडेंटिटी लेयर का नाम दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किरायेदारों के वर्षों के वेरिफाइड रेंट पेमेंट हिस्ट्री को उनकी वित्तीय पहचान का मुख्य हिस्सा बनाना है। यदि आने वाले समय में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो यह भारत के लोन सिस्टम में एक बड़ी क्रांति लेकर आएगा। तब किराया सिर्फ एक खर्च नहीं रह जाएगा, बल्कि यह एक ऐसा दस्तावेज बन जाएगा जिसके दम पर भविष्य में घर, वाहन या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए लोन लेना काफी आसान हो जाएगा। इस बदलाव से औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच उन लोगों तक भी बढ़ जाएगी जो अब तक क्रेडिट स्कोर की जटिलताओं के कारण दूर थे।
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