सफलता की नई इबारत
बाड़मेर जिले के चवा गांव से आने वाले 20 वर्षीय मोती सिंह पोटलिया ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो आज के दौर के युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोती सिंह ने किसी बड़े शहर की कोचिंग या महंगे संसाधनों का सहारा लिए बिना, अपने गांव में रहकर ही यह मुकाम हासिल किया है। महज 20 साल की अल्प आयु में चार सरकारी नौकरियों में चयन होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी इस कामयाबी ने न केवल उनके परिवार का बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
साधारण पृष्ठभूमि और मजबूत इरादे
मोती सिंह के पिता जोगेंद्र सिंह पोटलिया जूनियर अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता केसी देवी एक गृहिणी हैं। एक साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े मोती सिंह की शुरुआती पढ़ाई चवा गांव के स्थानीय स्कूल में ही हुई। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी हाई स्कूल से अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। उनके पिता ने हमेशा उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया और मोती सिंह ने भी अपनी पढ़ाई के प्रति हमेशा निष्ठा दिखाई।
सफलता का सफरनामा
मोती सिंह की मेहनत तब रंग लाई जब उन्होंने एक के बाद एक परीक्षाओं में सफलता के झंडे गाड़ दिए। उनकी उपलब्धियों का विवरण इस प्रकार है:
- पुलिस कॉन्स्टेबल: 20 साल की उम्र में उन्होंने सबसे पहले इस भर्ती परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी: इस भर्ती परीक्षा में उन्होंने 2367वीं रैंक हासिल की।
- तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल-1: इस परीक्षा में उन्होंने 722वीं रैंक प्राप्त की।
- कृषि सुपरवाइजर: इस महत्वपूर्ण परीक्षा में मोती सिंह ने पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान हासिल किया।
लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण
इतनी सारी सरकारी नौकरियों में चयन होने के बाद भी मोती सिंह का सफर अभी रुका नहीं है। उनका सपना अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का है। वे अपनी उच्च शिक्षा जारी रखना चाहते हैं ताकि वे अपने बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। हालांकि, वर्तमान में उन्होंने तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर कार्यभार संभालने का निर्णय लिया है। मोती सिंह का मानना है कि सफलता का कोई जादुई शॉर्टकट नहीं होता। उनके अनुसार, नियमित रूप से पढ़ाई करना, अनुशासन बनाए रखना और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना ही कामयाबी की एकमात्र चाबी है।
ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा
मोती सिंह का यह मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। उन्हें बस सही दिशा, मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास की जरूरत होती है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो, तो अभाव बाधा नहीं बनते। मोती सिंह की यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर सफलता का परचम लहराना चाहता है। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि कठिन परिश्रम और सही रणनीति से किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है।
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