सीतामढ़ी के लाल शशि रंजन सुमन बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, जानें सफलता की पूरी कहानी

सीतामढ़ी के रहने वाले शशि रंजन सुमन ने महज 22 साल 8 महीने की उम्र में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने छात्रों को TES और JEE के माध्यम से सेना में अधिकारी बनने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं।

सीतामढ़ी की माटी का मान बढ़ाया

बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले शशि रंजन सुमन ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित होकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केवल 22 साल 8 महीने की उम्र में यह मुकाम हासिल करने वाले शशि रंजन की कामयाबी से पूरे इलाके में खुशी की लहर है। स्थानीय युवा उनकी इस सफलता से न केवल गौरवान्वित हैं, बल्कि खुद भी देश सेवा के लिए प्रेरित हो रहे हैं। शशि रंजन का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके शिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन, माता-पिता का सहयोग और उनकी अपनी स्कूली शिक्षा की मजबूत नींव का बड़ा हाथ है।

टेक्निकल एंट्री स्कीम और JEE का महत्व

भारतीय सेना में शामिल होने के इच्छुक युवाओं के लिए शशि रंजन ने टेक्निकल एंट्री स्कीम यानी TES की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है। उन्होंने बताया कि इस रास्ते से सेना में अधिकारी बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता का कड़ा पैमाना निर्धारित है। इसके लिए छात्र का कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषयों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। साथ ही, इन विषयों में कुल मिलाकर 85 प्रतिशत से अधिक अंक होना आवश्यक है।

इसके अलावा, उम्मीदवार का JEE Mains परीक्षा में शामिल होना भी अनिवार्य है। शशि रंजन के अनुसार, इस परीक्षा में 85 परसेंटाइल से अधिक का स्कोर प्राप्त करना होता है। इन अंकों को भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट करना होता है, जिसके बाद ही उम्मीदवार को अगले चरण यानी इंटरव्यू के लिए बुलावा आता है।

SSB इंटरव्यू और कठिन सैन्य प्रशिक्षण

सेना में चयन की प्रक्रिया किसी भी छात्र के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। आवेदन के बाद उम्मीदवार को पांच दिनों के कड़े और चुनौतीपूर्ण एसएसबी (SSB) इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है। इस दौरान उम्मीदवार की मानसिक सतर्कता, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक फिटनेस का बारीकी से परीक्षण किया जाता है। एसएसबी इंटरव्यू के बाद मेडिकल जांच होती है और अंत में मेरिट सूची तैयार की जाती है।

शशि रंजन ने अपनी ट्रेनिंग के सफर के बारे में साझा करते हुए बताया कि उनकी शुरुआती ट्रेनिंग ओटीए (OTA) गया में संपन्न हुई। इसके बाद उन्होंने तीन साल तक सीटीडब्ल्यू (CTW) सिकंदराबाद में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कठिन सफर का अंतिम चरण देहरादून में एक महीने की पीओपी (POP) प्रैक्टिस के रूप में पूरा हुआ, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक रूप से कमिशनिंग मिली।

असफलता से डरना नहीं, आगे बढ़ना है लक्ष्य

युवाओं के लिए प्रेरणा बने लेफ्टिनेंट शशि रंजन सुमन ने उन छात्रों को खास संदेश दिया है जो सेना में जाने का सपना देख रहे हैं। उन्होंने सफलता का मूल मंत्र देते हुए निरंतरता और धैर्य पर विशेष जोर दिया। शशि रंजन ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्हें खुद तीन बार 'स्क्रीन आउट' होने का दुखद अनुभव झेलना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी।

शशि रंजन ने युवाओं को सलाह दी कि यदि वे किसी एक प्रयास में असफल हो जाते हैं, तो उन्हें दोबारा प्रयास करने से कतई नहीं घबराना चाहिए। उनका मानना है कि हार को स्वीकार करके बैठ जाने के बजाय लगन और कड़ी मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है। उनके इस संघर्ष और सफलता की कहानी अब उन सभी युवाओं के लिए एक मशाल का काम कर रही है जो देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती होने की इच्छा रखते हैं।

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