तेजस Mark-1A का लंबा इंतजार
भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या को पूरा करने के लिए स्वदेशी तकनीक से बने तेजस लड़ाकू विमानों पर काफी दारोमदार है। अब तक भारतीय वायुसेना को तेजस Mark-1 के 38 विमान मिल चुके हैं, लेकिन उन्नत वर्जन यानी तेजस Mark-1A का अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है। भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच कुल 180 तेजस Mark-1A विमानों की खरीद का समझौता हुआ है। हालांकि, तय की गई समय-सीमा के बार-बार चूकने के कारण यह पूरा प्रोजेक्ट देरी का शिकार हो गया है।
सितंबर में हो सकती है अगली समीक्षा
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, तेजस Mark-1A कार्यक्रम की प्रगति को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड सितंबर के महीने में भारतीय वायुसेना के समक्ष एक समीक्षा रिपोर्ट पेश कर सकती है। इस रिपोर्ट को मूल रूप से अप्रैल के महीने में पेश किया जाना था, जिसे बाद में मई के लिए आगे बढ़ाया गया। इसके बाद जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की थी, जिसमें तेजस कार्यक्रम भी मुख्य रूप से शामिल था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर में रिपोर्ट के साथ स्थिति अधिक स्पष्ट हो पाएगी।
तकनीकी खामियां और रडार का प्रदर्शन
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने पूर्व में आयोजित समीक्षा बैठकों में यह स्पष्ट किया था कि बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार इंटीग्रेशन का काम संपन्न हो चुका है। हालांकि, रडार की कार्यक्षमता में सुधार जैसे कुछ तकनीकी पहलुओं पर काम अभी भी बाकी था। यदि सितंबर की बैठक में रडार प्रदर्शन की कमियों को दूर कर लिया जाता है और भारतीय वायुसेना इन सुधारों से संतुष्ट हो जाती है, तो विमान की डिलीवरी की सटीक तारीख सामने आ सकती है।
इंजन की आपूर्ति बनी बड़ी चुनौती
तेजस कार्यक्रम की धीमी गति के पीछे एक प्रमुख कारण इंजन की आपूर्ति में देरी भी रही है। हालांकि, अब इंजनों की उपलब्धता में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। वर्तमान में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास कुल छह इंजन उपलब्ध हैं। इनमें से छठा इंजन मई में प्राप्त हुआ था, लेकिन प्रारंभिक तकनीकी जांच में उसमें कुछ कमियां पाई गईं। किसी भी नए उपकरण के मिलने के बाद अनिवार्य जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके तहत कंपनी के इंजीनियरों ने इंजन का परीक्षण किया। इन तकनीकी खामियों को अमेरिकी कंपनी जीई (GE) के ध्यान में लाया गया, जिन्होंने बाद में उन्हें ठीक कर दिया।
अमेरिकी कंपनी के साथ समझौता
बता दें कि तेजस Mark-1A कार्यक्रम के लिए इंजन की आपूर्ति का करार साल 2021 में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के साथ हुआ था। इस समझौते के तहत भारत को कुल 99 एफ404 इंजन प्राप्त करने हैं। इसके अलावा, नवंबर 2025 में अतिरिक्त 97 तेजस Mark-1A विमानों के लिए 113 इंजनों का एक और सौदा भी फाइनल किया गया है।
जुर्माने की तैयारी और भविष्य की उम्मीद
तेजस Mark-1A की डिलीवरी में हो रही निरंतर देरी से भारतीय वायुसेना काफी खफा है और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। इस स्थिति को देखते हुए अब रक्षा मंत्रालय हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पर जुर्माना यानी पेनल्टी लगाने पर विचार कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि भी की है। दूसरी ओर, इंजन की आपूर्ति में हुई देरी के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भी अमेरिकी कंपनी जीई पर जुर्माना लगाने की बात पहले कह चुकी है। रक्षा मंत्रालय को अब भी यह उम्मीद है कि इसी साल विमानों की पहली खेप वायुसेना को मिल सकती है। वर्तमान में कंपनी के पास छह इंजन हैं और करीब 18 विमानों का ढांचा तैयार है। साल के अंत तक लगभग 24 विमानों के तैयार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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