यूपी बनेगा ग्लोबल हब
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'इन्वेस्ट यूपी' और 'टीमलीज ग्रुप' के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य राज्य में निवेश को आकर्षित करना और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में फाइनल हुई डील
यह महत्वपूर्ण समझौता बेंगलुरु में आयोजित उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026 के दौरान हुआ। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उपस्थित थे, जिनकी मौजूदगी में दोनों पक्षों ने इस डील को अंतिम रूप दिया। सरकार का मानना है कि यह साझेदारी राज्य की औद्योगिक छवि को बदलने में मददगार साबित होगी।
कंपनियों को क्या मिलेगा खास फायदा
इस नई डील के तहत जो भी नए जीसीसी उत्तर प्रदेश में स्थापित होंगे, उन्हें सरकार और टीमलीज की तरफ से विशेष पैकेज दिया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- नए स्थापित होने वाले जीसीसी को 90 दिनों तक पूरी तरह मुफ्त वर्कफोर्स उपलब्ध कराई जाएगी।
- कंपनियों को एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर आधारित एक विशेष एडवाइजरी पैकेज भी प्रदान किया जाएगा।
- यह सुविधा कंपनियों को अपने संचालन को आसानी से शुरू करने और तकनीक के साथ तालमेल बिठाने में मदद करेगी।
2031 तक 500 नए सेंटर्स का लक्ष्य
राज्य सरकार ने अपनी 'जीसीसी पॉलिसी-2024' के माध्यम से एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का उद्देश्य है कि वर्ष 2031 तक उत्तर प्रदेश में कम से कम 500 नए जीसीसी स्थापित किए जाएं। इस रणनीति का असर केवल नोएडा जैसे विकसित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका लाभ लखनऊ और कानपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों को भी मिलेगा। इससे इन शहरों में टैलेंट नेटवर्क का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं को उनके घर के नजदीक ही बेहतरीन नौकरियां मिल सकेंगी।
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