केतन अग्रवाल मर्डर केस: चट्टान से धक्का देने के बाद सिया का वो चिल्लाना और गार्ड का 5 मिनट का बड़ा खुलासा

पुणे के लोहागढ़ किले में बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में सुरक्षा गार्ड धीरज जाधव के बयान ने पूरी कहानी बदल दी है। गार्ड ने बताया कि घटना के ठीक बाद सिया गोयल का व्यवहार कैसा था और कैसे उसने इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की थी।

लोहागढ़ किले में मौत का रहस्य और गार्ड का खुलासा

पुणे स्थित लोहागढ़ किले में बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत का मामला हर दिन एक नई दिशा ले रहा है। इस हत्याकांड में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके साथी चेतन चौधरी मुख्य आरोपी हैं, जिन पर सुनियोजित तरीके से हत्या की साजिश रचने का आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब लोहागढ़ किले के सुरक्षा गार्ड धीरज जाधव ने एक बेहद महत्वपूर्ण गवाही दी है, जिसने घटना के उन 5 मिनटों का राज खोल दिया है जो अब तक अनसुलझे थे।

गार्ड ने सुनाई घटना वाली सुबह की आपबीती

सुरक्षा गार्ड धीरज जाधव ने अपने बयान में बताया कि घटना के दिन वह हमेशा की तरह अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात थे। शांति के बीच अचानक उन्हें दूर से किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। आवाज इतनी तेज थी कि वह उसे नजरअंदाज नहीं कर सके और तुरंत उसी दिशा में भागना शुरू कर दिया। गार्ड जब घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने वहां मौजूद पर्यटकों से पूछताछ की कि आखिर हुआ क्या है।

गार्ड के मुताबिक, वहां मौजूद सिया गोयल उस समय अत्यधिक घबराहट का नाटक कर रही थी। उसने गार्ड को देखते ही चिल्लाते हुए कहा कि कोई व्यक्ति नीचे गिर गया है। गार्ड ने बताया कि सिया का बर्ताव पूरी तरह से डरा हुआ दिखाने की कोशिश जैसा था, जिससे यह साबित हो सके कि यह एक महज हादसा था। चूँकि किले के उस दुर्गम इलाके में नेटवर्क की भारी समस्या रहती है, इसलिए मदद के लिए संपर्क करना चुनौती भरा था, लेकिन गार्ड ने तुरंत पुलिस को घटना की जानकारी दी।

शादी की खुशियों के बीच बिछी साजिश की बिसात

केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी की तैयारियां पूरे जोरों पर थीं। दोनों का विवाह नवंबर 2026 में राजस्थान के उदयपुर में आयोजित होना था। शादी के लिए सभी बुकिंग पूरी कर ली गई थी और फरवरी महीने में ही दोनों की सगाई की रस्में संपन्न हुई थीं। हालांकि, जांच में अब यह बात स्पष्ट हो रही है कि इस खुशहाल दिखते रिश्ते के पीछे एक गहरा काला सच छिपा था। पुलिसिया जांच के अनुसार, सिया गोयल पिछले कुछ समय से लगातार केतन पर लोहागढ़ किले जाने का दबाव बना रही थी।

इतना ही नहीं, सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं था जब केतन की जान लेने की कोशिश की गई। इससे पहले भी एक बार जब वे दोनों लोहागढ़ किले गए थे, तब भी केतन को कथित रूप से धक्का देने का प्रयास हुआ था, लेकिन उस समय वह बाल-बाल बच गया था। तब भी सिया गोयल ने मामले को बड़ी चालाकी से संभाल लिया था और इसे एक मामूली हादसा बताकर सबको गुमराह कर दिया था।

जांच का दायरा और डिजिटल सबूतों की अहमियत

वर्तमान में पुलिस प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से पड़ताल कर रहा है। जांच का मुख्य केंद्र सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई बातचीत के साथ-साथ डिजिटल सबूतों पर टिका हुआ है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर साजिश का ताना-बाना कब और कैसे बुना गया था। घटनास्थल पर मौजूद अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी पुलिस के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

जांच एजेंसियां इस बात का भी बारीकी से अध्ययन कर रही हैं कि क्या चेतन चौधरी उस दिन वहां मौजूद था और यदि था, तो उसकी भूमिका क्या थी। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डेटा विश्लेषण आने वाले दिनों में इस केस का भविष्य तय करेंगे। फिलहाल, केतन की मौत को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए पुलिस इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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