अयोध्या राम मंदिर दान चोरी का मामला
अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे की राशि में चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने SIT की रिपोर्ट के आधार पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने देशभर में भक्तों की आस्था को गहरा धक्का पहुँचाया है, क्योंकि जिन लोगों को दान की पवित्र राशि की सुरक्षा और गिनती की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्हीं लोगों पर पैसे चुराने का आरोप लगा है।
कौन हैं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा?
इस पूरे प्रकरण में अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लवकुश मिश्रा के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। जांच में सामने आया है कि अनुकल्प मिश्रा अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले बसावां गांव का रहने वाला है। वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान की गणना और उसके रखरखाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देख रहा था। उसके साथ उसका बहनोई लवकुश मिश्रा भी इसी कार्य में तैनात था। विशेष बात यह है कि लवकुश मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के रिश्तेदार भी बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडेय शामिल हैं। इनमें से कई आरोपी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ सदस्यों के करीबी बताए जा रहे हैं।
चोरी की साजिश और खुलासा
चोरी का यह खेल काफी लंबे समय से चल रहा था, जिसका खुलासा मई महीने के आखिरी सप्ताह में हुआ। जब राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों ने बैंक में जमा की जा रही राशि और रोजाना दान पेटियों से निकल रही रकम के आंकड़ों का मिलान किया, तो उन्हें गड़बड़ी का अहसास हुआ। आमतौर पर एक दान पेटी से 6 से 7 लाख रुपये तक की राशि निकलती थी, लेकिन कुछ सप्ताह से 500 रुपये के नोटों की गड्डियों में कमी दर्ज की जा रही थी। संदेह गहराने पर नोट गिनने वाले कक्ष में चुपके से हिडन कैमरे लगाए गए। एक सप्ताह की फुटेज की जांच के बाद पूरे गिरोह का पर्दाफाश हो गया। वीडियो में साफ देखा गया कि कैसे कर्मचारी जानबूझकर सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते थे ताकि दूसरा साथी नोटों की गड्डी में से नोट निकालकर अपने कपड़ों में छुपा सके।
बैंक के साथ धोखाधड़ी का अनोखा तरीका
जांच में पता चला कि ये आरोपी केवल दान पेटी से ही नहीं, बल्कि बैंक में राशि जमा करने की प्रक्रिया के दौरान भी हेराफेरी कर रहे थे। ये कर्मचारी नोटों की हर गड्डी में अतिरिक्त नोट छुपाकर रखते थे। बैंक में जब राशि जमा की जाती थी, तो हर नोट को गिनने के बजाय सिर्फ गड्डियों की संख्या के आधार पर वाउचर तैयार कर लिया जाता था। इस तरह वाउचर और बैंक रिकॉर्ड का मिलान सही बैठता था, लेकिन मंदिर से बैंक ले जाने के दौरान आरोपी उन अतिरिक्त नोटों को गड्डी से निकाल लेते थे। अनुकल्प मिश्रा वाउचर बनाने की प्रक्रिया संभालता था और अपने बहनोई लवकुश मिश्रा के जरिए इस पूरी जालसाजी को अंजाम देता था। इस तरीके से उन्होंने ट्रस्ट के रिकॉर्ड में किसी भी विसंगति को आने नहीं दिया और लंबे समय तक चोरी जारी रखी। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है।
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