फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में SIR अभियान पर उठे सवाल, बीएलओ के काम करने के तरीके से ग्रामीण परेशान

हरियाणा में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर साहुपुरा गांव के लोग प्रशासन से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फॉर्म भरने में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और बीएलओ से उचित मदद नहीं मिल रही है।

मतदाता सूची सुधार अभियान और ग्रामीणों की राय

हरियाणा में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य में फर्जी मतदाताओं की पहचान करना और सूची को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित साहुपुरा गांव में भी यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस गांव में सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर रहते हैं और वे इस सरकारी पहल का समर्थन भी कर रहे हैं। हालांकि, अभियान के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय लोगों ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं और प्रशासन से बेहतर सहयोग की मांग की है।

फर्जी मतदान पर अंकुश लगाने की कोशिश

साहुपुरा गांव के निवासी मुबीन खान ने इस अभियान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एक बेहद सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि इससे उन तमाम गड़बड़ियों पर रोक लगेगी, जहां एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग जगहों पर कई फर्जी वोट दर्ज होते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मृत व्यक्तियों के नाम हटाना भी बहुत जरूरी है जो अभी भी सूची में बने हुए हैं। मुबीन खान ने गांव वालों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और यदि फॉर्म भरने में कोई परेशानी आए, तो संबंधित बीएलओ से संपर्क जरूर करें। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज अपने पुराने रिकॉर्ड को आधार बनाकर ही नई जानकारी अपडेट करें ताकि भविष्य में कोई समस्या न हो।

शिक्षित वर्ग ने भी दी अपनी सहमति

इस प्रक्रिया पर अपनी राय रखते हुए गांव के शिक्षित युवा दिलशाद खान ने कहा कि यह कदम चुनावी निष्पक्षता के लिए बेहद आवश्यक है। दिलशाद ने बताया कि उन्होंने एमएससी केमिस्ट्री की पढ़ाई पूरी की है और वे एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूची से फर्जी और मृत व्यक्तियों के नाम हटने चाहिए ताकि केवल असली मतदाता ही अपना अधिकार प्रयोग कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के हर जागरूक नागरिक को सरकार के इस अभियान में पूरी भागीदारी निभानी चाहिए।

फॉर्म भरने में हो रही है भारी परेशानी

अभियान का स्वागत करने के बावजूद ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फॉर्म को सही ढंग से भरने की है। स्थानीय निवासी हसीना ने बताया कि वे सरकार की इस नीति की सराहना करती हैं और उन्होंने फॉर्म तो ले लिया है, लेकिन उसमें पूछी गई कई जानकारियां आम लोगों के लिए समझना काफी जटिल है। इस कारण फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया में वे खुद को असहाय महसूस कर रही हैं।

बीएलओ के रवैये पर ग्रामीणों की नाराजगी

साहुपुरा की ही निवासी रिजवाना ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रिजवाना ने कहा कि उनका परिवार दशकों से इसी गांव में रह रहा है और यहीं उनकी जड़ें हैं। सरकार का काम अच्छा है, लेकिन बीएलओ जिस तरह से काम कर रहे हैं, उससे लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। रिजवाना का आरोप है कि बीएलओ केवल फॉर्म देकर चले जाते हैं, वे लोगों को यह समझाने की कोशिश नहीं करते कि उस फॉर्म को ठीक तरह से कैसे भरना है। रिजवाना ने कहा कि वे आंगनबाड़ी केंद्र से फॉर्म लेकर आई थीं, लेकिन मार्गदर्शन के अभाव में उसे भरने में उन्हें भारी उलझन हो रही है।

प्रशासन से की गई मदद की अपील

मुबीन खान ने आगे जोड़ते हुए कहा कि गांव में ऐसे भी कई लोग हैं जो अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं। उन्हें यह बिल्कुल समझ नहीं आ रहा कि फॉर्म के किस कॉलम में कौन सी जानकारी भरनी है। ग्रामीण पूरे दिन अपना काम-धंधा छोड़कर फॉर्म भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। ग्रामीणों की मांग है कि बीएलओ केवल फॉर्म बांटने की औपचारिकता न निभाएं, बल्कि उन्हें घर-घर जाकर लोगों की मदद करनी चाहिए। यदि बीएलओ लोगों का मार्गदर्शन करें और खुद फॉर्म भरवाने में सहायता दें, तो यह अभियान न केवल आसान हो जाएगा बल्कि इसका असर भी अधिक प्रभावी होगा।

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