भारत की वो जादुई जगह जहां जमीन करती है ट्रैम्पोलिन का काम, पैर रखते ही उछलने लगते हैं लोग

छत्तीसगढ़ के मैनपाट में एक ऐसी जगह मौजूद है जहां की जमीन स्पंज की तरह दबती है और उस पर चलने या कूदने पर आप हवा में उछलने लगते हैं। इस रहस्यमयी जगह के पीछे का असली वैज्ञानिक कारण अब सामने आ गया है।

धरती का अनोखा बर्ताव और लोगों का अनुभव

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है जहां कई ऐसी जगहें मौजूद हैं जो विज्ञान और कुदरत के अजूबों से भरी पड़ी हैं। कहीं गुरुत्वाकर्षण के नियम को चुनौती देती ढलानें हैं, तो कहीं ऊपर की ओर बहने वाले झरने पर्यटकों को हैरान कर देते हैं। इसी कड़ी में एक बेहद रोमांचक और जादुई जगह के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जहां कदम रखते ही धरती किसी स्पंज की तरह नीचे की ओर धंसने लगती है। इतना ही नहीं, यदि कोई इस जगह पर कूदने का प्रयास करे, तो जमीन उसे झटके से वापस हवा में उछाल देती है। यह नजारा किसी आधुनिक ट्रैम्पोलिन जैसा लगता है, जिसे देखकर कोई भी दांतों तले उंगली दबा ले।

छत्तीसगढ़ का मैनपाट और जलजली

यह अनोखी और रहस्यमयी जगह छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित है। इस इलाके का नाम मैनपाट है, जो अपनी ठंडी जलवायु और सुंदर वादियों के कारण काफी प्रसिद्ध है। मैनपाट की खूबसूरती के कारण ही इसे पर्यटकों के बीच छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है। इसी खूबसूरत हिल स्टेशन के भीतर लगभग 300 स्क्वैयर मीटर के दायरे में एक विशेष स्थान है जिसे स्थानीय लोग 'जलजली' के नाम से बुलाते हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर इससे संबंधित वीडियो देखे जा सकते हैं, जिनमें लोग जमीन पर कूदकर हवा में उछलते हुए दिखाई देते हैं।

वैज्ञानिकों ने सुलझाया इस रहस्य को

इस जमीन के हिलने-डुलने और स्पंज की तरह व्यवहार करने के पीछे के कारणों को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने यहां विस्तृत अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जमीन का लचीलापन यहां की खास मिट्टी की संरचना के कारण है। यहां पाई जाने वाली मिट्टी को पीट सॉयल कहा जाता है। पिछले सैकड़ों वर्षों से यहां की जमीन पर पेड़-पौधों के अवशेष, सूखी घास और पत्तियां जमा होती रही हैं। ये जैविक पदार्थ बिना पूरी तरह सड़े हुए मिट्टी के साथ मिलकर एक अत्यंत लचीली और स्पंज के समान परत बना चुके हैं।

हाइड्रोलिक इफेक्ट का कमाल

वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि इस स्पंजी परत के ठीक नीचे पानी की भारी मात्रा मौजूद है, जो एक छुपे हुए जलस्रोत की तरह काम करती है। जब भी कोई व्यक्ति इस जगह पर अपना पैर रखता है या उछल-कूद करता है, तो उसके वजन का दबाव सीधे इस लचीली परत पर पड़ता है और जमीन नीचे की तरफ धंस जाती है। जैसे ही व्यक्ति अपना पैर हटाता है, जमीन से दबाव कम हो जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान जमीन के नीचे मौजूद पानी अपनी पूरी ताकत से ऊपर की ओर धकेलता है। विज्ञान की शब्दावली में इसे हाइड्रोलिक इफेक्ट कहा जाता है। पानी के इसी शक्तिशाली दबाव के कारण जमीन अचानक वापस ऊपर की तरफ उठती है और वहां मौजूद इंसान को हवा में उछाल देती है।

मिट्टी का सटीक वैज्ञानिक विश्लेषण

प्रयोगशाला में इस मिट्टी के नमूनों की गहन जांच करने पर इसके घटकों का सटीक खुलासा हुआ है। मिट्टी की इस खास बनावट में निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:

  • 18% ऑर्गेनिक फाइबर।
  • 80.8% सिल्ट यानी गाद।
  • 0.9% क्ले यानी चीका मिट्टी।
  • 0.3% रेत।

इन घटकों का मिश्रण इतना संतुलित है कि यहां की मिट्टी का पीएच स्तर सदैव न्यूट्रल बना रहता है। यही कारण है कि यह प्राकृतिक ट्रैम्पोलिन जैसी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सालों से निरंतर चल रही है। आज यह जगह न केवल एक भौगोलिक जिज्ञासा का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बेहद लोकप्रिय हो चुकी है। बड़ी संख्या में पर्यटक मैनपाट की इस हिलती हुई धरती का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं और इस अनोखी प्राकृतिक घटना का आनंद उठाते हैं।

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