RE-NEET धांधली पर बिहार पुलिस का कड़ा रुख, 12 सदस्यीय SIT का गठन

नीट परीक्षा में हुई धांधली की जांच अब एक विशेष टीम करेगी, जिसमें डीआईजी के नेतृत्व में 12 अधिकारी शामिल हैं। पुलिस अब छात्रों के घरों तक पहुंचकर पूछताछ करेगी और गिरफ्तार सॉल्वरों को रिमांड पर लिया जाएगा।

RE-NEET मामले में SIT का सख्त एक्शन

नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर सामने आई अनियमितताओं के बाद बिहार पुलिस ने अपनी जांच की गति काफी बढ़ा दी है। इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करने के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन कर दिया गया है। आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के एडीजी के दिशा-निर्देशों के बाद डीआईजी के नेतृत्व में 12 सदस्यों वाली इस टीम को तैयार किया गया है। यह टीम अब पूरी तरह से इस परीक्षा घोटाले के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए काम करेगी।

टीम की संरचना और कार्यप्रणाली

इस गठित टीम में उच्च स्तरीय अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और त्वरित हो सके। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस 12 सदस्यीय टीम का नेतृत्व एक DIG स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। इसके अलावा टीम में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:

  • एक SP स्तर के अधिकारी।
  • कुल 5 DSP स्तर के अधिकारी।
  • कुल 5 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी।

यह टीम जल्द ही उन अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी जो इस पूरी धांधली के केंद्र में हैं। इसके लिए टीम एनएटीए यानी NTA को पत्र लिखकर अभ्यर्थियों के रोल नंबर और उनसे जुड़ी अन्य जानकारियां मांगेगी। एक बार सही पहचान हो जाने के बाद, संबंधित उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। यदि नोटिस के बावजूद अभ्यर्थी सहयोग नहीं करते हैं या उपस्थित नहीं होते हैं, तो SIT की टीम सीधे उनके घर पहुंचकर उनसे पूछताछ करेगी।

लखीसराय से शुरू हुआ था खुलासे का सिलसिला

इस पूरे मामले की जड़ें 21 जून को लखीसराय जिले में हुई कार्रवाई से जुड़ी हैं। उस दिन जिले के 3 अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी के दौरान 9 सॉल्वरों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई के दौरान एक मूल अभ्यर्थी को भी पुलिस हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि बायोमैट्रिक सिस्टम में बड़ी छेड़छाड़ की गई थी, जिसके आरोप में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 2 और संदिग्ध सहयोगियों को भी पकड़ा गया। इस मामले में तीन अलग-अलग पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिन्हें अब EOU ने अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है और अब इनकी जांच भी यही SIT करेगी। जांच एजेंसी का यह मानना है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह द्वारा चलाया गया बड़ा नेटवर्क है, जिसके तार बिहार के कई जिलों से लेकर अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं।

रिमांड पर होगी पूछताछ और सख्त कार्रवाई

अब SIT गिरफ्तार किए गए सॉल्वरों को रिमांड पर लेकर उनसे गहन पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच का मुख्य केंद्र यह रहेगा कि बायोमैट्रिक जैसी सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कैसे की गई। इसके लिए बायोमैट्रिक सिस्टम के साथ कथित गड़बड़ी करने वाले कर्मियों से भी कड़ी पूछताछ की जाएगी। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा केंद्रों पर पहचान की पुष्टि वाली प्रक्रिया को कैसे तोड़ा गया और इसके पीछे कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं। SIT के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस धांधली में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। पूरे नेटवर्क को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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