मचान विधि से करें करेले की उन्नत खेती, बंपर पैदावार के साथ होगा शानदार मुनाफा

करेले की खेती में मचान विधि अपनाकर किसान अपनी उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

मचान विधि खेती में क्यों है फायदेमंद

यदि आप करेले जैसी बेलदार फसलों की खेती करने की सोच रहे हैं, तो मचान विधि आपके लिए सबसे आधुनिक और प्रभावी तरीका साबित हो सकती है। यह तकनीक बेलों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। इस विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सीमित जगह का उपयोग करके आप न केवल अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता को भी उच्च स्तर पर बनाए रख सकते हैं। पारंपरिक जमीन पर फैलने वाली खेती की तुलना में मचान विधि में बेलें ऊपर की ओर बढ़ती हैं, जिससे पौधों का विकास अधिक बेहतर तरीके से होता है।

उत्पादन और फलों की सुरक्षा

मचान विधि का उपयोग करने से फलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है। चूंकि बेलें जमीन को नहीं छूतीं, इसलिए करेले सड़ने की समस्या खत्म हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक से खेती करने पर सामान्य पैदावार की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह विधि व्यावसायिक खेती के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है।

बुवाई की सही प्रक्रिया

करेले की गर्मियों वाली फसल के लिए जून से जुलाई का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। फसल की सफलता के लिए बुवाई का तरीका जानना भी बहुत जरूरी है। बुवाई करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • बीजों को बोने से पहले उनका सही तरीके से उपचार अवश्य करें।
  • बीजों को जमीन में 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर ही लगाएं।
  • दो बीजों के बीच या एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी कम से कम 2 फीट जरूर रखें।

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