अनोखी भर्ती प्रक्रिया ने खींचा ध्यान
मध्य प्रदेश में वन विभाग द्वारा आयोजित की गई एक भर्ती प्रक्रिया इन दिनों खासी चर्चा का विषय बनी हुई है। सीधी जिले में वन रक्षक के कुल 8 पदों के लिए विभाग ने एक विशेष अभियान चलाया था। इस भर्ती का मुख्य उद्देश्य राज्य के अत्यंत पिछड़े और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों यानी पीवीटीजी (PVTG) जैसे कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों को सरकारी सेवा में मौका देना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना था।
केवल एक अभ्यर्थी पहुंची मैदान में
पात्रता की पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद विभाग ने फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट के लिए कुल 25 अभ्यर्थियों को कॉल लेटर भेजे थे। सभी को शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन परीक्षा के दिन जो नजारा देखने को मिला, उसने सबको हैरान कर दिया। नियत स्थान पर तय समय के अनुसार केवल एक महिला अभ्यर्थी ही परीक्षा देने के लिए पहुंची।
उस अकेली महिला उम्मीदवार ने पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ न केवल अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि परीक्षा के सभी मानकों को भी सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें 15 किलोमीटर की कठिन पैदल चाल भी शामिल थी, जिसे उसने बखूबी पूरा किया। उसकी इस मेहनत और लगन को देखते हुए उसे वन रक्षक के पद के लिए चयनित कर लिया गया।
क्यों खाली रह गए 7 पद?
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि बाकी के 7 पद खाली रह गए, क्योंकि कोई भी अन्य अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुआ। इस घटना ने सरकारी तंत्र और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का निम्न स्तर।
- सरकारी नौकरियों के बारे में सही और समय पर जानकारी का अभाव।
- रोजगार के अवसरों के प्रति सीमित जागरूकता।
- भौगोलिक दूरियां और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां।
भविष्य के लिए सबक और समाधान
इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है। यह स्पष्ट है कि सिर्फ भर्ती निकाल देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन तक पहुंच बनाना भी उतना ही जरूरी है। अधिकारियों का मानना है कि अगर इन विशेष समुदायों तक सरकारी योजनाओं और रोजगार की सूचनाएं अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाएं, तो तस्वीर बदल सकती है।
भविष्य में ऐसी भर्तियों को सफल बनाने के लिए युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति प्रोत्साहित करने, उन्हें जरूरी ट्रेनिंग दिलाने और शिक्षा का स्तर सुधारने की तत्काल आवश्यकता है। जब तक जनजातीय युवाओं को सही मार्गदर्शन और समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक सरकारी प्रयासों का लाभ उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएगा।
जागरूकता पर बढ़ते सवाल
वन रक्षक भर्ती में 25 पात्र उम्मीदवारों के चयन के बावजूद केवल एक का परीक्षा में पहुंचना इस ओर इशारा करता है कि दूरस्थ आदिवासी इलाकों में भर्ती प्रक्रिया की पहुंच अभी भी बहुत सीमित है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और लोग भर्ती प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने तथा जनजातीय क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग भविष्य की भर्तियों में किस तरह की रणनीति अपनाता है ताकि सरकारी पदों के लिए पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार उत्साहपूर्वक आगे आ सकें।
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