हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर तनाव, निहंगों ने तोड़े बैरिकेड्स; जानें क्या है पूरा विवाद

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुई झड़प के बाद हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। निहंग सिखों ने बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया है, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद से हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर भारी तनाव देखने को मिल रहा है। सीमा की ओर बढ़ रहे निहंग सिखों को रोकने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, विकासनगर के कुल्हाल बॉर्डर पर निहंगों ने न केवल जमकर नारेबाजी की, बल्कि बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की भी कोशिश की। इस दौरान पथराव की खबरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गए हैं।

कुल्हाल बॉर्डर पर तैनात की गई अतिरिक्त पुलिस फोर्स

निहंगों के हंगामे को देखते हुए बॉर्डर वाले इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सीमा से गुजरने वाली हर गाड़ी की बारीकी से जांच की जा रही है। कर्णप्रयाग विवाद के बाद निहंगों द्वारा उत्तराखंड कूच के ऐलान के चलते प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस, आईटीबीपी के अधिकारी और प्रशासनिक टीमें लगातार हालात पर नजर रख रही हैं। मामले का समाधान निकालने के लिए पोंटा साहिब गुरुद्वारे में उत्तराखंड प्रशासन, हिमाचल प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर भी चल रहा है।

क्या है कर्णप्रयाग विवाद की असल वजह?

यह पूरा विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच हुई मारपीट से शुरू हुआ था, जिसमें 4 स्थानीय निवासी घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने 4 निहंगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले निहंगों ने नगरासू स्थित गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया था, जिसे बाद में प्रशासन और पंजाब से आए शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद खाली कराया गया।

बॉर्डर पर मौजूद निहंगों का कहना है कि उनका मकसद कानून व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है, बल्कि वे शांतिपूर्ण ढंग से हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाना चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि गिरफ्तार किए गए उनके 4 साथियों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए।

पुलिस का क्या कहना है?

रुद्रप्रयाग में हुए नगरासू गुरुद्वारा विवाद पर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है। गढ़वाल के इंस्पेक्टर जनरल राजीव स्वरूप ने गलत सूचनाओं को खारिज करते हुए बताया कि विवाद गुरुद्वारा प्रबंधन और वहां लंगर खा रहे निहंग श्रद्धालुओं के बीच बहस से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, 'प्रबंधन ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। पुलिस को देखते ही कुछ निहंग घबरा गए और छत पर चले गए। हमने उनसे कई दौर की बातचीत की थी।'

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