ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व और तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद विशेष माना गया है। इसे जेठ पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है। आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार यह तिथि भाग्य को चमकाने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।
वैदिक पंचांग के आधार पर ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि 29 जून को तड़के 3 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ होकर 30 जून की सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व 29 जून, सोमवार को मनाया जाएगा।
पूजन का लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सत्यनारायण की विधि-विधान से पूजा करने से घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संध्या काल में माता लक्ष्मी की आराधना करने और उन्हें नैवेद्य अर्पित करने से धन-धान्य की कमी नहीं रहती। इसके अतिरिक्त चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
ज्येष्ठ पूर्णिमा की रात कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख और सौभाग्य का वास होता है:
- दीपदान का महत्व: पवित्र नदी में दीपदान करने से पितृ दोष का शमन होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में खुशहाली आती है।
- रसोईघर में दीपक: घर के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रसोईघर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
- मुख्य द्वार पर रोशनी: घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर रात के समय दीपक जलाएं। माना जाता है कि इसी मार्ग से माता लक्ष्मी का आगमन होता है, जिससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
- तुलसी पूजा: पूर्णिमा की सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें। यह उपाय धन और संपत्ति में बढ़ोतरी के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है।
https://hindi.news18.com/news/dharm/jyeshtha-purnima-upay-for-prosperity-know-exact-date-and-significance-local18-10603724.html