मानसून के दौरान गन्ने की सुरक्षा की चुनौती
झारखंड के देवघर और आसपास के इलाकों में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए आने वाला समय बहुत संवेदनशील है। हालांकि राज्य में मानसून की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन देवघर जिले में अब तक झमाझम बारिश नहीं हुई है। कृषि जानकारों का मानना है कि किसानों को केवल बारिश के भरोसे रहने के बजाय अपने खेतों में सुरक्षात्मक इंतजाम अभी से मुकम्मल कर लेने चाहिए।
फसल को नुकसान से कैसे बचाएं
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि समय रहते कुछ जरूरी एहतियाती कदम उठाने से गन्ने की फसल को मानसून की मार से बचाया जा सकता है। ऐसा न करने पर तेज हवाओं और भारी बारिश की स्थिति में फसल के जमीन पर गिरकर खराब होने का डर बना रहता है।
- खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी जमा न हो।
- अगर फसल की ऊंचाई अधिक है, तो उसे सहारा देने की प्रक्रिया पर ध्यान दें।
- मिट्टी की नमी और उर्वरक प्रबंधन को मानसून की जरूरतों के अनुसार समायोजित करें।
- नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करते रहें ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी या कीट के हमले को समय रहते रोका जा सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसान अभी से इन तैयारियों को पूरा कर लेते हैं, तो न केवल फसल के गिरने का खतरा कम होगा बल्कि मानसून के बाद उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार देखने को मिलेगा। लापरवाही बरतने से गन्ने की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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