मानसून की सौगात
छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन के साथ ही जंगलों और खेतों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला मशरूम पैरा पुटू बाजारों में पहुंच चुका है। ग्रामीण इलाकों में इसे गांवों का सोना कहा जाता है। अपनी विशिष्ट पौष्टिकता और लाजवाब स्वाद के कारण इस मशरूम का इंतजार साल भर किया जाता है। फिलहाल बिलासपुर के बाजारों में यह लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।
कीमत में उछाल
बाजार में पैरा पुटू की उपलब्धता सीमित होने के कारण इसके दाम काफी अधिक रहते हैं। वर्तमान में शुरुआती बारिश के दौरान इसकी कीमत 400 रुपये प्रति किलो तय की गई है। हालांकि, विक्रेता दिनेश घोरे का कहना है कि जैसे-जैसे सावन का महीना करीब आएगा, इसकी मांग और कीमत दोनों में तेजी आएगी। सावन में इसकी कीमत बढ़कर 600 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है।
सावन में बढ़ती है मांग
इस मशरूम की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वाद है, जो काफी हद तक मांसाहारी भोजन जैसा होता है। यही कारण है कि सावन के पवित्र महीने में जो लोग धार्मिक कारणों से मांस-मछली का सेवन बंद कर देते हैं, वे पैरा पुटू को एक बेहतरीन विकल्प के रूप में चुनते हैं। सावन के दौरान इसकी मांग बाजार में चरम पर रहती है।
जांजगीर-चांपा से होती है आवक
विक्रेताओं के मुताबिक, इस मशरूम को मुख्य रूप से जांजगीर-चांपा क्षेत्र से लाया जाता है। जब बारिश के बाद मौसम में उमस बढ़ती है, तब इसका उत्पादन तेजी से होता है। यह प्राकृतिक उत्पाद केवल कुछ ही दिनों के लिए उपलब्ध रहता है, जिसके कारण बाजार में इसकी हमेशा भारी डिमांड बनी रहती है। कई वर्षों से इस कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को इस मौसम का बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि यह उनकी आजीविका का एक महत्वपूर्ण जरिया बन जाता है।
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