इंसाफ की जीत, गुना कोर्ट का सख्त फैसला
गुना के विशेष न्यायालय में पोक्सो (POCSO) मामलों की न्यायाधीश श्रीमती सोनाली शर्मा ने एक बेहद गंभीर मामले में अपना निर्णय सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग शिष्या के साथ वर्षों तक हैवानियत करने वाले दो कराटे कोचों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 7-7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब पीड़िता की उम्र महज 12 साल 1 माह थी। आरोपी सचिन भटनागर (30 वर्ष) वाडो काई कराटे एसोसिएशन में कराटे सिखाता था, जहाँ पीड़िता प्रशिक्षण लेने आती थी। आरोप है कि कोच ने शादी का झांसा देकर नाबालिग का गुना के जंगलों, रेलवे क्रॉसिंग और विभिन्न होटलों में लगातार शारीरिक शोषण किया। इस दरिंदगी में उसका साथी जगवीर जाटव (40 वर्ष) भी शामिल था।
टूर्नामेंट के नाम पर रची साजिश
दोषियों ने अपनी हवस पूरी करने के लिए पीड़िता को अलग-अलग शहरों और देशों की सैर कराई। आरोपी पीड़िता को खेल टूर्नामेंट के बहाने मुंबई, विशाखापट्टनम और सुदूर देश मलेशिया ले गए, जहाँ उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में एक तीसरे आरोपी संजीव चौधरी का नाम भी सामने आया था, लेकिन पीड़िता द्वारा पहचान नहीं किए जाने के कारण अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया है।
कानूनी कार्रवाई और परिणाम
विशेष न्यायाधीश श्रीमती सोनाली शर्मा ने 25 जून 2026 को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पीड़िता को न्याय मिला है। गुना में यह मामला न केवल चर्चा का विषय बना रहा, बल्कि खेल के क्षेत्र में गुरु और शिष्या के पवित्र रिश्ते को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना के रूप में दर्ज हुआ।
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