मैदा और सूजी में बुनियादी अंतर
भले ही मैदा और सूजी दोनों ही गेहूं से प्राप्त होते हैं, लेकिन इनके बनाने की प्रक्रिया इन्हें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बना देती है। डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार, मैदा को रिफाइनिंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें गेहूं की बाहरी परत और जर्म पूरी तरह से हटा दिए जाते हैं, जिससे केवल स्टार्च बचता है। इसके विपरीत, सूजी को गेहूं से मोटा पीसकर तैयार किया जाता है, जिससे इसकी दानेदार बनावट और कुछ प्राकृतिक पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।
फाइबर और पोषण का स्तर
मैदा अत्यधिक रिफाइंड होने के कारण फाइबर में बेहद गरीब होता है। इसके पोषक तत्व प्रोसेसिंग के दौरान लगभग खत्म हो जाते हैं, जिससे यह शरीर को केवल कैलोरी देता है। सूजी में प्रोसेसिंग कम होती है, जिसके चलते इसमें प्रोटीन, विटामिन और कुछ खनिज तत्व मैदा की तुलना में अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं।
ब्लड शुगर पर प्रभाव
मैदा से बनी चीजें शरीर में बहुत तेजी से पचती हैं, जिससे रक्त में शुगर का स्तर अचानक बढ़ सकता है। यही कारण है कि मधुमेह के मरीजों को मैदा से दूर रहने की सलाह दी जाती है। सूजी का प्रभाव मैदा से थोड़ा बेहतर माना गया है, हालांकि इसका असर भी मात्रा पर निर्भर करता है। डायबिटीज के रोगियों को इनका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
अत्यधिक सेवन से जुड़ी चुनौतियां
- मैदा में फाइबर की कमी होने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
- अत्यधिक मैदा या सूजी का सेवन शरीर में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा कर सकता है।
- संतुलित आहार में फल, सब्जियां और साबुत अनाज का अभाव होने पर वजन बढ़ने का खतरा रहता है।
- दोनों ही चीजों का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
निष्कर्ष: क्या चुनें?
सेहत की दृष्टि से सूजी को मैदा की तुलना में एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है, क्योंकि इसमें मैदा की अपेक्षा अधिक पोषण शेष रहता है। हालांकि, किसी भी चीज की अति सेहत के लिए नुकसानदायक है। किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना ही स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहता है।
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