खेती में नई राह
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले किसान राघवेंद्र मिश्रा ने साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक और सूझबूझ के साथ खेती की जाए, तो इसमें मोटी कमाई संभव है। राघवेंद्र पारंपरिक तरीके से हटकर आधुनिक विधियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें कम लागत में अधिक पैदावार मिल रही है। गन्ने की फसल एक नकदी फसल है, जिसकी मांग चीनी मिलों से लेकर गुड़ और खांडसारी उद्योगों तक हमेशा बनी रहती है।
शिक्षा के बाद कृषि को चुना
राघवेंद्र मिश्रा ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाने के लिए काफी प्रयास किए। हालांकि, जब उन्हें मनचाहा अवसर नहीं मिला, तो उन्होंने निराश होने के बजाय अपने पिता से विरासत में मिली खेती को अपना करियर बनाया। बचपन से ही उन्हें खेती में रुचि थी, जिसका लाभ उन्हें आज अपनी फसल की देखरेख में मिल रहा है।
आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन
राघवेंद्र का कहना है कि गन्ने की फसल एक बार लगाने पर लंबे समय तक उत्पादन देती है। वे फसल की अच्छी उपज के लिए निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देते हैं:
- उचित उर्वरक प्रबंधन: मिट्टी की आवश्यकतानुसार संतुलित खाद का उपयोग।
- समय पर सिंचाई: फसल को सूखने से बचाने के लिए नियमित पानी देना।
- खरपतवार नियंत्रण: पौधों को पोषण देने के लिए समय-समय पर सफाई करना।
- रोगों से सुरक्षा: फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए तकनीकी सलाह का उपयोग।
कम लागत में बंपर कमाई
राघवेंद्र वर्तमान में लगभग दो एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार, एक बीघा जमीन में गन्ने की फसल तैयार करने में लगभग 12 से 15 हजार रुपये की लागत आती है। इस मेहनत के बदले में उन्हें एक बीघा से लगभग 80 कुंतल से 100 कुंतल तक गन्ने की पैदावार मिल जाती है। राघवेंद्र को इस बार अपनी मेहनत से लाखों रुपये की आमदनी होने की पूरी उम्मीद है। वे भविष्य में अपने इस खेती के काम को और अधिक विस्तार देने की योजना बना रहे हैं।
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