आषाढ़ मास कब से शुरू होगा
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ का पावन महीना 30 जून 2026 से आरंभ हो रहा है। ज्येष्ठ मास की समाप्ति के बाद आने वाला यह महीना न केवल वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत देता है, बल्कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद फलदायी माना गया है। यह समय आत्म-चिंतन और ईश्वर के प्रति समर्पण के लिए समर्पित है।
आषाढ़ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ के महीने को संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह समय भगवान विष्णु की विशेष उपासना के लिए उपयुक्त है। इस दौरान मंत्रों का जाप और सात्विक जीवन जीने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसी महीने से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जिसे शास्त्रों में जप, तप और दान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
साधना और जप का विशेष महत्व
आषाढ़ के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस अवधि में किए गए धार्मिक अनुष्ठान और व्रत जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाले माने गए हैं। श्रद्धालु इस पूरे महीने को भक्ति में बिताकर आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आषाढ़ में अपनाएं ये शुभ कार्य
- नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का निरंतर जाप करना बहुत फलदायी है।
- अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
- तुलसी के पौधे की देखभाल करें और प्रतिदिन शाम के वक्त दीपक जलाएं।
- अपने जीवन में सात्विकता को प्राथमिकता दें।
इन बातों से बनाएं दूरी
- भोजन में तामसिक चीजों जैसे प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- नशीले पदार्थों और मदिरा के सेवन से पूरी तरह परहेज रखें।
- वाणी पर संयम रखें और किसी के प्रति भी कटु शब्दों का प्रयोग न करें।
- धार्मिक मान्यताओं और व्रतों के नियमों का पालन पूरी श्रद्धा के साथ करें।
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