आपातकाल की यादें और लोकतंत्र पर प्रहार
संविधान हत्या दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल के उस कठिन समय को याद किया, जिसे उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दौर भारतीय संविधान पर एक सीधा और गहरा प्रहार था, जिसके दौरान नागरिक अधिकारों को पूरी तरह से कुचल दिया गया था।
लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि आपातकाल के दौरान किस तरह से अभिव्यक्ति की आजादी पर ताले लगा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं और समाज के जागरूक वर्ग के लोगों को जेल में डाल दिया गया था। साथ ही, वे सभी संस्थाएं जो हमारे लोकतंत्र का आधार हैं, उन पर भी हमले किए गए थे। हालांकि, प्रधानमंत्री ने उन तमाम नागरिकों के साहस की भी सराहना की जिन्होंने उस दमनकारी समय में चुप रहने से इनकार कर दिया और संविधान के आदर्शों को जीवित रखा।
भारत के भविष्य के लिए नया संकल्प
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए नरेंद्र मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। प्रधानमंत्री ने संकल्प लेते हुए कहा कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर अडिग रहे।
स्वतंत्रता का महत्व
प्रधानमंत्री ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए संस्कृत के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही मनुष्य के सुख और परम उपलब्धि का एकमात्र मार्ग है। संविधान हत्या दिवस हमें उस काले समय की याद दिलाता है और हमें इस बात के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए हमेशा सतर्क और प्रतिबद्ध रहें।
https://hindi.news18.com/news/nation/pm-modi-says-one-of-darkest-chapters-in-indias-history-on-51st-anniversary-of-1975-emergency-10601271.html