रेडियोलॉजिस्ट से आगे निकले कबूतर
कैंसर जैसी घातक बीमारी का समय पर पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। अमूमन सीटी स्कैन की रिपोर्ट रेडियोलॉजिस्ट द्वारा जांची जाती है, लेकिन कई बार मानवीय चूक की गुंजाइश बनी रहती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर दस में से तीन स्कैन में रेडियोलॉजिस्ट ट्यूमर की पहचान करने में असफल हो जाते हैं। हालांकि, अब इस समस्या के समाधान के लिए अमेरिका में एक अनूठा प्रयोग किया गया है, जहां छह कबूतरों को कैंसर का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
इस तरह दिया गया कबूतरों को प्रशिक्षण
मैसाचुसेट्स स्थित कॉलेज ऑफ द होली क्रॉस के शोधकर्ता डॉ ग्रेगरी डिगिरोलामो ने यह शोध संपन्न किया है। उन्होंने छह कबूतरों को सीटी स्कैन के वीडियो दिखाकर उन्हें फेफड़ों में गांठ यानी नोड्यूल की पहचान करना सिखाया। प्रशिक्षण के दौरान:
- कबूतरों को स्कैन के वीडियो दिखाए गए ताकि वे कैंसरयुक्त और सामान्य स्कैन के बीच फर्क समझ सकें।
- सही पहचान करने पर कबूतरों को खाद्य सामग्री का इनाम दिया गया, जिससे उन्होंने इसे जल्द ही सीख लिया।
- हैरानी की बात यह रही कि ये पक्षी उन नए स्कैन में भी ट्यूमर ढूंढने में सफल रहे, जिन्हें उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
क्यों इंसान से चूक हो जाती है
डॉ ग्रेगरी द्वारा 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मानव मस्तिष्क की अपनी सीमाएं हैं। आई-ट्रैकिंग तकनीक से यह पता चला है कि जब कोई रेडियोलॉजिस्ट ट्यूमर देखता है, तो उसकी आंखें उस स्थान पर रुकती हैं और पुतलियां फैलती हैं। इसका अर्थ यह है कि डॉक्टर का अवचेतन मन ट्यूमर को भांप तो लेता है, लेकिन चेतन मन इसे दर्ज नहीं कर पाता। इसके विपरीत, कबूतरों की दृष्टि और सीखने की क्षमता ने इस मामले में डॉक्टरों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह शोध आने वाले समय में मेडिकल डायग्नोसिस की दिशा में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
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