आर्थिक बदलाव की कहानी
पाली जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हेमावास गांव आज आत्मनिर्भरता की एक नई पहचान बन चुका है। उदयपुर मेगा हाईवे पर बसा यह गांव पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल गया है। यहाँ के करीब 1500 घरों में से हर दूसरे घर में महिलाएं चमचमाती चूड़ियां बनाने का काम कर रही हैं। यह उद्योग अब गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है।
तकनीक से मिला नया मुकाम
एक समय था जब यहाँ चूड़ियां बनाने का काम केवल हाथों से बहुत सीमित मात्रा में होता था। लेकिन पिछले 10 सालों में तस्वीर बदल गई है। अब आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से महिलाएं चूड़ियों पर नगीने जड़ने का काम बड़े स्तर पर कर रही हैं। इस उद्योग से गांव की लगभग 2000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि स्वयं मैन्यूफैक्चरिंग का काम भी संभाल रही हैं। इनके इसी हुनर और मेहनत की सराहना रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी कर चुके हैं।
खेती और बांध का योगदान
हेमावास की समृद्धि के पीछे यहां के बांध का भी बड़ा हाथ है। यह बांध न केवल क्षेत्र की सिंचाई की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि शहर की प्यास बुझाने का मुख्य स्रोत भी है। जब बांध में पानी रहता है, तो यहां गेहूं की बंपर फसल होती है। वहीं, जब पानी कम होता है, तो यहां की जमीन पर पैदा होने वाली सब्जियां और खरबूजे पूरे मारवाड़ क्षेत्र में अपनी मिठास के लिए मशहूर हैं।
गांव की स्थिति पर एक नजर
- जनसंख्या: करीब 4000 निवासी।
- साक्षरता: 65 फीसदी साक्षरता दर।
- कनेक्टिविटी: जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर और उदयपुर मेगा हाईवे पर स्थित।
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