तारातला हादसे पर सरकार सख्त
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम के ढह जाने से मचे कोहराम के बाद राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कड़ा बयान दिया है। बुधवार को हुए इस हादसे में कई मजदूरों की जान चली गई और कई लोग मलबे के नीचे दब गए थे। घटना स्थल का मुआयना करने पहुंचे मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस घटना को पिछले 15 वर्षों से पनप रहे अवैध निर्माणों का नतीजा बताया है।
जांच के घेरे में 15 साल पुराने निर्माण
राहत और बचाव कार्य की स्थिति को देखते हुए तापस रॉय ने कहा कि अवैध निर्माणों को पिछले 15 सालों से बढ़ावा दिया जा रहा था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब बहुत हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में जितने भी अवैध ढांचे मौजूद हैं, उन सभी की बारीकी से जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उनका मानना है कि इस तरह की लापरवाही के खिलाफ कठोर कदम उठाना समय की मांग है।
क्या है तारातला गोदाम हादसे की वजह
बुधवार की दोपहर तारातला के ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर स्थित ब्रेस ब्रिज के पास एक निजी कंपनी का तीन मंजिला गोदाम बन रहा था। घटना उस समय हुई जब गोदाम की पहली और दूसरी मंजिल की ढलाई का काम चल रहा था। तभी अचानक भारी-भरकम लोहे के गर्डर और कंक्रीट की छत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। उस वक्त साइट पर 50 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे।
घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल
कोलकाता नगर निगम के इंजीनियरों की शुरुआती रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि गोदाम का डिजाइन पूरी तरह से दोषपूर्ण था। जो लोहे के बीम लगाए गए थे, वे कंक्रीट की छत का वजन उठाने में सक्षम नहीं थे। स्थानीय लोगों का भी आरोप है कि इलाके में लंबे समय से नगर निगम और पोर्ट ट्रस्ट की मिलीभगत से अवैध निर्माण किए जा रहे थे।
सियासी गलियारों में हड़कंप
इस दुखद हादसे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी गर्माहट ला दी है। जहां मंत्री तापस रॉय इसे पिछले 15 साल के कुशासन का परिणाम बता रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि किस आधार पर और किन लोगों की अनुमति से ये अवैध निर्माण जारी थे।
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