खेती में लागत कम करने का तरीका
आज के दौर में किसान लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहे हैं। खेती की बदलती शैली में प्राकृतिक खेती का रुझान तेजी से बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा फायदा खेती में आने वाली लागत में भारी कमी के रूप में दिखाई दे रहा है। किसान अब कम खर्च में बेहतर उपज प्राप्त करने की ओर अग्रसर हैं।
स्वास्थ्य और जमीन की सेहत पर असर
पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी का मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल फसलों को उगाने का एक तरीका नहीं है, बल्कि यह आम लोगों को स्वस्थ और विषमुक्त जीवन देने का एक बड़ा जरिया है। उनके अनुसार, लंबे समय तक रसायनों के अंधाधुंध उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उत्पादन बनाम मिट्टी की शक्ति
रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग के कारण हालांकि फसलों के उत्पादन में अस्थायी बढ़ोतरी जरूर देखने को मिली, लेकिन इसका सबसे नकारात्मक प्रभाव जमीन की प्राकृतिक ताकत पर पड़ा है। भारत भूषण त्यागी के अनुसार, जमीन की इस खोई हुई ताकत को वापस लाने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना अनिवार्य हो गया है।
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