खेती की लागत घटाने में मददगार
धान की खेती में लगातार बढ़ती खाद और उर्वरकों की कीमतों के कारण किसान आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने इसका एक सस्ता और प्राकृतिक समाधान सुझाया है, जिसे अजोला कहा जाता है। यह छोटा सा जलीय पौधा खेत की मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ रासायनिक खादों की निर्भरता को कम करने में सक्षम है।
अजोला कैसे काम करता है
अजोला एक प्रकार की जलीय फर्न है जो पानी की सतह पर हरे रंग की परत के रूप में दिखाई देती है। इसमें ब्लू ग्रीन एल्गी सयानोबैक्टीरिया पाया जाता है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सोखकर मिट्टी में पहुँचाने का काम करता है। इसे धान की रोपाई के एक सप्ताह बाद पानी से भरे खेत में छिड़का जाता है। गया जिले के प्रगतिशील किसान श्रीनिवास कुमार का मानना है कि इसके उपयोग से यूरिया और नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों की जरूरत में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।
खरपतवार और निराई का झंझट खत्म
धान के खेतों में खरपतवार की समस्या एक बड़ी चुनौती होती है। अजोला पानी की सतह को पूरी तरह से ढक लेता है, जिससे सूर्य की किरणें नीचे तक नहीं पहुँच पातीं। रोशनी की कमी के कारण खरपतवार पनप नहीं पाते। इससे किसानों को निराई और गुड़ाई पर होने वाले खर्च और मजदूरी के अतिरिक्त भार से छुटकारा मिलता है।
पशुपालन में भी फायदेमंद
अजोला का उपयोग केवल खेती तक ही सीमित नहीं है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मौजूद होता है, जो पशुओं के लिए एक बहुत ही पौष्टिक आहार है। किसान इसका उत्पादन करके अपने दुधारू पशुओं को खिला सकते हैं, जिससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि दूध उत्पादन में भी वृद्धि देखी गई है।
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