सरकार और यूनियन के बीच तकरार
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी (HRTC) चालक और परिचालक यूनियन की हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार ने हड़ताल को विफल करने के लिए एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है और हड़ताल में भाग लेने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शिमला में एक प्रेस वार्ता के दौरान कर्मचारियों को साफ तौर पर कहा है कि यदि वे बसें नहीं चलाना चाहते हैं, तो बसों की चाबियां सरकार को सौंप दें।
आपातकालीन आधार पर नई भर्तियां
परिवहन मंत्री ने जानकारी दी कि परिवहन सेवाएं किसी भी हाल में बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकार ने प्रदेश के 31 डिपो में 656 चालक और परिचालकों की 6 महीने के लिए आपातकालीन आधार पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। इन कर्मचारियों को 1500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। वहीं, नाहन और ऊना सहित विभिन्न डिपो में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नाहन में 25 पदों के लिए 400 से अधिक अभ्यर्थी पहुंचे हैं।
यूनियन का रुख और पेंशनरों का साथ
एचआरटीसी चालक-परिचालक यूनियन के सह-कोषाध्यक्ष लेज राम का कहना है कि कर्मचारियों की लंबी समय से लंबित देनदारियां और वेतन की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो आज रात 12 बजे के बाद से बस सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी। इस आंदोलन को एचआरटीसी पेंशनरों का भी समर्थन प्राप्त है, जिनका आरोप है कि सरकार की ओर से वेतन और पेंशन को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से अलग हैं।
मंत्री ने दी सफाई
मुकेश अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने कर्मचारियों की वित्तीय मांगों पर हमेशा संवाद का रास्ता खुला रखा है। उन्होंने बताया कि एचआरटीसी कर्मचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिल रहा है और निगम में ओपीएस (OPS) की सुविधा भी दी गई है। मंत्री ने कहा कि एचआरटीसी की बसों में प्रतिदिन लगभग पांच लाख यात्री सफर करते हैं, इसलिए चक्का जाम करना जनहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1 जनवरी 2023 से 30 मार्च 2026 तक कुल 239.45 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ जारी किए हैं।
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