निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू कैलेंडर में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए कठोर उपवास का पालन करते हैं, जो सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक चलता है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत के साथ ही इस तिथि पर दान का भी विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है और ईश्वर की कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है।
दान के लिए शुभ सामग्रियां
निर्जला एकादशी भीषण गर्मी के दौरान आती है, इसलिए इस दिन ऐसी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है जो दूसरों को राहत और शीतलता प्रदान करें।
- जल से भरा घड़ा: इस दिन जल दान को सर्वोत्तम माना गया है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को मिट्टी का नया घड़ा भेंट करना पुण्यकारी है। आप राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था कर सकते हैं या उन्हें ठंडा शरबत पिला सकते हैं।
- मौसमी फल: इस दौरान आम, तरबूज और खरबूजे जैसे रसीले मौसमी फलों का दान करने से घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।
- गर्मी से बचाव की वस्तुएं: अत्यधिक गर्मी को देखते हुए छाता और हाथ से चलने वाले पंखों का दान करना बहुत शुभ होता है। इससे भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- खाद्य सामग्री: सत्तू, गुड़ और चने का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पारिवारिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- वस्त्र और जूते: राहगीरों को सूती वस्त्र और चप्पल दान करना भी अत्यंत परोपकारी कार्य माना गया है।
निर्जला एकादशी दान का सही समय
निर्जला एकादशी पर दान का कार्य एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के पारण तक किया जा सकता है। वर्ष 2026 में दान के लिए कुछ विशेष शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
- 25 जून को सुबह 05:25 बजे से सुबह 10:30 बजे तक।
- 25 जून को शाम 05:30 बजे से सूर्यास्त तक।
- 26 जून को सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे के बीच।
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