पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक बेहद गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए विशेष पॉक्सो अदालत ने सौतेली बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले व्यक्ति को कठोरतम सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने आरोपी को जीवन के आखिरी पड़ाव तक जेल में रहने का आदेश दिया है। अदालत ने इसे भरोसे का सबसे घिनौना उल्लंघन करार देते हुए आरोपी पर सात लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास के काम आएगी।
मुंबई में शुरू हुआ सिलसिला
अदालत में पेश अभियोजन पक्ष के दस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता की मां ने कोरोना काल के बाद आरोपी के साथ विवाह किया था। परिवार अपनी आजीविका चलाने के लिए मुंबई चला गया, जहां आरोपी एक निर्माणाधीन इमारत में सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात था। पत्नी की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर आरोपी ने 11 वर्षीय मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया और लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा।
आयुष्मान सर्वे ने खोली पोल
दरिंदगी का यह मामला तब सामने आया जब परिवार मुंबई से वापस छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित अपने गांव लौटा। गांव में चल रहे आयुष्मान सर्वे के दौरान मितानिन स्मृति गोपाल की नजर बच्ची के शारीरिक बदलाव पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने तत्काल चिकित्सीय जांच की सलाह दी। जब बच्ची को बिलासपुर के सिम्स अस्पताल ले जाया गया, तो सोनोग्राफी रिपोर्ट में पता चला कि वह आठ महीने की गर्भवती है।
DNA रिपोर्ट से साबित हुआ जुर्म
शुरुआत में बच्ची की मां ने संदेह के आधार पर बाहर के युवकों पर आरोप लगाए थे, लेकिन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह को जांच के दौरान सौतेले पिता पर शक हुआ। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के लिए बच्ची, उसके नवजात शिशु और आरोपी पिता का डीएनए टेस्ट करवाया। डीएनए रिपोर्ट में सौ प्रतिशत मिलान होने के बाद आरोपी का गुनाह पूरी तरह प्रमाणित हो गया, जिसके आधार पर अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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