सामने आया बड़ा मुआवजा फर्जीवाड़ा
छत्तीसगढ़ में चल रहे भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। धमतरी जिले के कुरुद स्थित सिवनीकला गांव के प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया है कि रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए सड़क के रूट में बदलाव किया गया। किसान अब इस मामले की शिकायत लेकर ईओडब्ल्यू और ईडी के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
रूट बदलकर किया करोड़ों का खेल
किसानों का आरोप है कि परियोजना के पॉइंट नंबर-21 के बाद सड़क की दिशा को लगभग 25 मीटर तक मोड़ दिया गया। इस बदलाव का मकसद उन बंजर जमीनों को प्रोजेक्ट के दायरे में लाना था, जो मूल नक्शे में शामिल नहीं थीं। रूट में इस बदलाव से कई अपात्र लोगों को करोड़ों रुपये का अवैध मुआवजा मिलने का रास्ता खुल गया। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क का रास्ता एक किलोमीटर आगे बढ़ाया गया ताकि भू-माफियाओं को अनुचित लाभ दिया जा सके।
मास्टरमाइंड और संदिग्ध रजिस्ट्रियां
इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड टिकेश्वर उर्फ टिकेश्वर चंद्रकार को बताया गया है। जांच में सामने आया है कि साल 2019 में हुई 50 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों में उसने मुख्य गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही तारीख पर अलग-अलग नामों से कई रजिस्ट्रियां करवाई गईं, जिनमें प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार, परिचित और पंचायत से जुड़े लोग शामिल थे।
ठंडे बस्ते में गई जांच रिपोर्ट
गड़बड़ी की शिकायतों के बाद तत्कालीन संभाग कमिश्नर ने तीन कमेटियां बनाकर मामले की जांच करवाई थी और विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई थी। हालांकि, जैसे ही इस रिपोर्ट पर कार्रवाई का समय आया, तत्कालीन कमिश्नर का तबादला कर दिया गया और जांच फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। किसानों का आरोप है कि नए कमिश्नर के आने के बाद मामले में समीक्षा बैठकें बंद हो गईं और रसूखदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट को दबा दिया गया।
प्रशासन का क्या है पक्ष
इस पूरे मामले पर रायपुर संभाग के कमिश्नर श्याम धावड़े ने सफाई दी है। उनका कहना है कि पिछली जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि नई समिति की जांच रिपोर्ट मिलते ही उसे तत्काल सरकार के पास भेज दिया जाएगा। वहीं, पीड़ित किसान अब भी सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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