तंगहाली के आगे घुटने टेकने पर मजबूर पिता
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता को अपनी मजबूरी के कारण अपने ही बच्चों से दूर होना पड़ा। किंजिरकेला थाना इलाके के रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर ने आर्थिक तंगी के चलते अपने तीन बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के हवाले कर दिया है। यह कदम उसने तब उठाया जब घर चलाने के सारे रास्ते बंद हो गए थे।
पत्नी के जाने के बाद गहराया संकट
परिवार की स्थिति तब और बिगड़ गई जब पिता की पत्नी उन्हें और उनके चार बच्चों को छोड़कर चली गई। घर में कमाने वाला केवल एक व्यक्ति बचा था, जिसकी दिहाड़ी मजदूरी से परिवार का खर्च चलना नामुमकिन हो गया था। पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को दो वक्त का भोजन उपलब्ध कराना और उनकी देखभाल करना थी।
बीमारी और कुपोषण से जूझते मासूम
गरीबी का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ा। पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होने लगे थे और अक्सर बीमार रहने लगे थे। एक पिता के लिए अपने बच्चों को आंखों के सामने तड़पता देखना किसी सजा से कम नहीं था। जब स्थिति संभलने के बजाय और अधिक गंभीर हो गई, तो उसने भारी मन से यह कठोर निर्णय लिया।
बाल कल्याण समिति ने संभाली जिम्मेदारी
पिता ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से गुहार लगाई कि वे उसके बच्चों को अपनी देखरेख में ले लें। इस मामले में **पांच** साल का बेटा, **आठ** साल की बेटी और **दस** साल की बेटी शामिल है। समिति ने परिवार की दयनीय स्थिति की जांच की और दावों को सही पाया। इसके बाद, तीनों बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में भेज दिया गया है, जहां उन्हें अब बेहतर पोषण, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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