बलिया की अदालत का सख्त फैसला
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक मासूम बच्चे के साथ हुए अन्याय के मामले में स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। 9 दिसंबर 2021 को हुई इस घटना में आरोपी रितेश गुप्ता ने गांव के ही एक 10 वर्षीय दलित बच्चे को झांसा देकर छत पर बुलाया और उसके साथ गलत काम किया। लगभग साढ़े चार साल के कानूनी संघर्ष के बाद अब पीड़ित को न्याय मिला है।
पुलिस की कार्रवाई और अदालती प्रक्रिया
घटना के अगले दिन ही बच्चे के दादाजी ने साहस दिखाते हुए बांसडीह रोड थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट पेश की। इस मामले की सुनवाई बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए गठित विशेष POCSO अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान 23 जून 2026 को अदालत के जज प्रथमकांत ने दोनों पक्षों की गवाही और दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।
दोषी को सुनाई गई कड़ी सजा
सरकारी वकील विमल कुमार राय के अनुसार, अदालत ने रितेश गुप्ता को सभी आरोपों में दोषी करार दिया है। अपराध की गंभीरता को भांपते हुए अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, आरोपी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले ने समाज में एक मजबूत संदेश दिया है कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में कानून सख्त कदम उठाएगा। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को राहत मिली है।
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