पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारी बवाल: जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने मुनीर की सेना को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले तीन हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब और तीव्र हो गए हैं, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना को चेतावनी देते हुए अपनी मांगों को मानने के लिए 24 घंटे की समय सीमा दी है।

तनाव की स्थिति और चेतावनी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लंबे समय से चल रहा जन आक्रोश अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सेना को 24 घंटे का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं, तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

रावलाकोट में हुंकार

रावलाकोट में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए जेएएसी नेता सरदार अमान कश्मीरी ने स्पष्ट किया कि अब तक आंदोलनकारी शांति बनाए हुए हैं, लेकिन उन्हें हिंसा के लिए उकसाना भारी पड़ सकता है। उन्होंने क्षेत्र में पाकिस्तानी रेंजर्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए और कहा कि इस्लामाबाद को यहाँ सैन्य बल बढ़ाने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देते हुए सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी की मांग की है। सभा में प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में नारा लगाया कि 'ये वतन हमारा है' और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की कसम खाई।

दमन और गिरफ्तारियों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले 3 हफ्ते के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने दमन की नीति अपनाते हुए 1,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। जेएएसी नेताओं ने यह भी दावा किया कि उनके नेता शौकत नवाज मीर के घर पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने रात के अंधेरे में छापा मारा और भारी तोड़-फोड़ की। शौकत नवाज मीर ने एक ऑडियो संदेश जारी कर मुजफ्फराबाद डिवीजन के निवासियों से 23 जून को पूर्ण बंद का सख्ती से पालन करने की अपील की है।

आंदोलन के मुख्य कारण

PoK में जारी इस विरोध के पीछे के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

  • महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली तथा पानी की भारी किल्लत।
  • पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं का दमन और गिरफ्तारियाँ।
  • सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के जरिए नियंत्रण रखने की नीति।
  • 45 सदस्यीय विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों का विरोध।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तानी प्रशासन इस 24 घंटे की समय सीमा के भीतर कोई बातचीत का रास्ता निकालता है या स्थिति और अधिक बिगड़ने की ओर अग्रसर होती है।

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