हैदराबाद की 400 साल पुरानी परंपरा, हाथी पर सवार होकर निकलता है बीबी का अलम

मोहर्रम के मौके पर हैदराबाद में बीबी का अलम जुलूस एक खास शाही रिवायत है, जिसमें पवित्र अलम को हाथी पर बैठाकर निकाला जाता है।

शाही परंपरा का प्रतीक

हैदराबाद की ऐतिहासिक विरासत में मोहर्रम के दौरान निकलने वाला बीबी का अलम जुलूस एक बेहद खास स्थान रखता है। यह 400 साल पुरानी धार्मिक और शाही परंपरा है, जो आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। इस जुलूस की शुरुआत कुतुब शाही शासनकाल के दौरान हुई थी।

निजामों से जुड़ा इतिहास

समय के साथ इस परंपरा को और अधिक भव्यता मिली। कुतुब शाही काल के बाद हैदराबाद के निजामों ने भी इस जुलूस को पूरा राजकीय सम्मान दिया और इसे आगे बढ़ाया। यह आयोजन शहर की साझा संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द की एक बड़ी मिसाल माना जाता है।

हाथी की सवारी है आकर्षण

इस जुलूस की सबसे बड़ी पहचान वह शाही हाथी है, जिस पर पवित्र अलम को विराजित करके ले जाया जाता है। बीते वर्षों में हैदरी, रजनी और हाशमी जैसे हाथियों ने इस पवित्र जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है। मोहर्रम की 10वीं तारीख को आयोजित होने वाला यह जुलूस अपनी गहरी आस्था और भव्यता के लिए पूरे देश में चर्चित रहता है।

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