वैश्विक मंच पर नागौरी अश्वगंधा की चमक
कभी नागौर के जंगली इलाकों में स्वतः उगने वाली नागौरी अश्वगंधा ने आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बना ली है। जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब विदेशी नेताओं को भेंट स्वरूप इसे दिया, तो इसकी लोकप्रियता और अधिक बढ़ गई है। यह राजस्थान के इस पारंपरिक उत्पाद के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
क्यों खास है नागौरी अश्वगंधा
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि नागौर की जलवायु और मिट्टी में पनपने वाली इस अश्वगंधा की गुणवत्ता अद्वितीय है। इसमें विथेनोलाइड्स और अन्य जरूरी औषधीय तत्वों की मात्रा काफी अधिक होती है। यही कारण है कि इसे बाजार में श्रेष्ठ माना जाता है।
खेती की प्रक्रिया और मुनाफा
स्थानीय किसान प्रकाश ढाका बताते हैं कि इसकी खेती में लगभग 10 महीने का लंबा समय लगता है। इस पौधे का हर हिस्सा कीमती है, चाहे वो इसके बीज हों या फिर जड़ें। वर्तमान में बाजार में इसकी कीमत करीब 3 हजार रूपए किलो तक पहुंच चुकी है। बढ़ती हुई मांग के कारण नागौर के किसानों की आय में भी सुधार की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी फायदे
आयुर्वेद में नागौरी अश्वगंधा को एक प्रभावी औषधि माना गया है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
- शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाना।
- मानसिक तनाव को कम करने में सहायक।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करना।
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